बालीवुड एक्टर राजबब्बर की पत्नी और रंगकर्मी नादिरा जहीर बब्बर का सपना रंगकर्मियों को पहचान दिलाने के साथ उनके आर्थिक हालात को बेहतर करने की है। वह चाहती हैं कि रंगकर्मियों की अजीविका का बंदोबस्त किया जाए।
चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा चंडीगढ़ सेक्टर-34 में आयोजित थिएटर वर्कशॉप में ट्रेनिंग के लिए पहुंची नादिरा बब्बर ने कहा कि रंगमंच में पैसे नहीं। ऐसी स्थिति में कलाकारों से क्यों उम्मीद करें, वह अपनी जिंदगी इसमें लगा दें।
यह अलग बात है कि हिंदी की तुलना में गुजराती, बंगाली और मराठी थिएटर के हालात बेहतर हैं। लेकिन, हालात के बेहतर होने से कुछ नहीं होता, जब तक आर्थिक तंगी दूर नहीं की जाएगी, तब तक काम कैसे चलेगा।
नादिरा बब्बर ने कहा कि जो आर्टिस्ट थिएटर में काम करते हैं उनके लिए अजीविका तभी हो सकती है, जबकि स्कूलों और कालेजों में थिएटर का चैप्टर शामिल किया जाए।
इसके माध्यम से कम से कम आर्टिस्ट थिएटर से न सही इससे जुड़े अध्यापन प्रोफेशन को अपनाकर बेहतर काम चला सकता है।
चंडीगढ़ में है टैलेंट
नादिरा बब्बर ने कहा कि चंडीगढ़ में टैलेंट खूब है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी वर्कशाप के दौरान देखा है कि आर्टिस्ट बेहतर ढंग से काम करते हैं।
आर्य बब्बर ने किया है प्ले
नादिरा बब्बर ने कहा कि आर्य बब्बर भी प्ले में रुचि रखते हैं। उन्होंने बताया कि आर्य की सभी फिल्में वह देखती हैं। उनको जो कमी लगती है जरूर बताती हैं।
दो सौ सीटर हाल बनवाएंगी नादिरा
नादिरा बब्बर की तमन्ना है कि वह थिएटर आर्टिस्टों के लिए मुंबई में दो सौ सीटर हाल बनवाएं। जिससे थिएटर को एक और मंच दिया जा सके। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रोजेक्ट के लिए सरकार से मदद की मांग की जा रही है।
आर्टिस्टों के लिए नादिरा के टिप्स
1-शार्टकट न अपनाएं
2-धीरे-धीरे आगे बढ़ें
3-दूसरों से सीखते रहें
4-अपनी कमियां ढूंढें
यहूदी से शुरू किया सफर
नादिरा बब्बर ने अपना सफर यहूदी की लड़की नामक नाटक से किया था। इसके बाद उन्होंने कई नाटकों को निर्देशन किया।
1-संध्या छाया
2-लुक बैक इन एंगर
3-बल्लबपुर की रूपकथा
4-बात लात की हालात की
5-भ्रम के भूत
6-बेगम जान