चंडीगढ़। शहर में अफसरशाही हावी है। यह बात वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद पवन बंसल से लेकर भाजपा के नेता तक कहते रहे हैं लेकिन अब अफसरों पर मेयर के पद की गरिमा का ख्याल न रखने का आरोप लगा है और शिकायत केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई है। कहा गया है कि यह शहर के प्रथम नागरिक व जन प्रतिनिधि का अपमान है। इस संबंध में कार्रवाई की मांग भी की गई है।पूरा विवाद एक तस्वीर को लेकर हुआ है जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इसमें प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल और गृह सचिव नितिन यादव सोफे पर बैठे हैं और बूंदाबांदी की वजह से उनके सुरक्षाकर्मी छाता ताने हुए हैं लेकिन इसी तस्वीर में शहर के मेयर अनूप गुप्ता भी दिख रहे हैं, जिन्हें सलाहकार धर्मपाल के साथ नहीं बल्कि एक अलग कुर्सी पर बैठाया गया है। तस्वीर 25 मार्च की है। सुखना लेक पर यूटी प्रशासन के पर्यावरण विभाग की तरफ से जी-20 की बैठक को लेकर मैराथन का आयोजन किया गया था। इसमें प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल व अन्य अधिकारियों के अलावा मेयर अनूप गुप्ता भी आमंत्रित थे।
कार्यक्रम के एक दिन बाद से ही सोशल मीडिया पर यह तस्वीर शेयर होने लगी। सियासी गलियारों में भी इस तस्वीर की काफी चर्चा रही। लोगों का आरोप है कि कार्यक्रम में शहर के प्रथम नागरिक के पद की गरिमा का ध्यान नहीं रखा गया। उन्हें सलाहकार धर्मपाल के साथ बैठाना चाहिए था लेकिन उन्हें अलग कुर्सी पर बैठाया गया। कानून के जानकारों के अनुसार, किसी भी शहर में राज्यपाल के बाद मेयर का कद सबसे बड़ा होता है। चंडीगढ़ में प्रशासक के सलाहकार को राज्य के मुख्य सचिव के बराबर का दर्जा प्राप्त है। वह मेयर के बराबर हैं लेकिन मेयर का कद गृह सचिव से बड़ा होता है।
जनप्रतिनिधियों की यह स्थिति तो जनता के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे अधिकारी
चंडीगढ़ियन सोशल ग्रुप ऑफ सिटिजन्स के राज चड्ढा ने गृहमंत्री अमित शाह को लिखे शिकायती पत्र में कहा है कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान और बेइज्जती लोगों से जुड़ी होती है। प्रशासन के अधिकारियों ने शहर के मेयर जिसे प्रथम नागरिक का दर्जा प्राप्त है, उसका अपमान किया। जो सम्मान मेयर को मिलना चाहिए वह अधिकारी नहीं देते। ऐसा पार्षदों के साथ भी होता आया है। उन्होंने गृहमंत्री से कहा है कि वह इस सच्चाई की जांच भी करवा सकते हैं। उन्होंने अपने शिकायत पत्र के साथ 25 मार्च के कार्यक्रम की तस्वीर को भी अटैच किया है।
कुछ ही मिनटों में दिखानी थी हरी झंडी इसलिए कुर्सी पर बैठ गया
मैं जब कार्यक्रम में पहुंचा तो मैंने देखा कि प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल और गृह सचिव नितिन यादव सोफे पर बैठे थे। गृह सचिव ने मुझे सोफे पर बैठने की पेशकर की लेकिन मुझे अच्छा नहीं लगा कि उन्हें उठाकर मैं वहां बैठूं। वैसे भी कुछ ही मिनटों में मैराथन को हरी झंडी दिखानी थी इसलिए मैं बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया। छाते के लिए मैंने अपने पीएसओ को मना किया हुआ है।
- अनूप गुप्ता, मेयर
मेयर का प्रोटोकॉल ही तय नहीं
चंडीगढ़ में मेयर का प्रोटोकॉल क्या है, आज तक अच्छे से तय ही नहीं हो पाया है। हालांकि खुद से बनाया गया नियम यह है कि प्रशासक के सलाहकार के बाद मेयर का पद आता है। कई बार कार्यक्रमों में मेयर के साथ ऐसी गड़बड़ियां हुईं हैं, जिसके बाद सवाल उठते आए हैं लेकिन स्पष्टता की कमी है।
- सुभाष चावला, पूर्व मेयर
ये चंडीगढ़ की बेइज्जती
मेयर शहर का प्रथम नागरिक होता है। ये मेयर के साथ चंडीगढ़ की भी बेइज्जती है। चंडीगढ़ के प्रशासक खुद कई वर्षों तक जनप्रतिनिधि रहे हैं। मैं उनसे आग्रह करूंगा कि वह इस मुद्दे को देखें और अधिकारियों पर कार्रवाई करें।
- सतिंदर सिंह, वकील