नगर निगम आयुक्तों को हरियाणा अग्नि अधिनियम, 2009 के तहत भवन परिसर को सील करने, अपील करने और संशोधन करने की पूरी शक्तियां सौंप दी गई हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय भवन संहिता के प्रावधानों के अनुसार भूमि क्षेत्र पर किसी भी प्रकार की छत होने के बावजूद, फायर एनओसी प्रदान करने और अग्निशमन योजना को मंजूरी देने की शक्तियां भी नगर निगम आयुक्तों को सौंप दी गई हैं।
बैठक के दौरान शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने आयुक्तों और नगर निगमों के मामले में निविदाओं की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति की सीमा को बढ़ाकर क्रमश: 2.50 करोड़ रुपये और 10 करोड़ रुपये करने का भी प्रस्ताव रखा। यह भी प्रस्ताव रखा गया कि आयुक्त और नगर निगमों के पास क्रमश: 2.50 करोड़ रुपये और 10.00 करोड़ रुपये तक के पूंजीगत कार्यों को मंजूरी देने की शक्ति होनी चाहिए और इसी के साथ रखरखाव कार्यों के मामले में असीमित शक्ति दी जानी चाहिए।
यह भी प्रस्तावित किया गया कि उनके पास काम करने वाले अधिकारियों के एक निश्चित स्तर के संबंध में समवर्ती नियुक्ति प्राधिकारी की शक्तियां दी जानी चाहिए। बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि फरीदाबाद और गुरुग्राम के तर्ज पर भवन योजना और व्यवसाय प्रमाणपत्र के अनुमोदन के लिए आवश्यक शक्तियां भी शेष नगर निगमों के आयुक्तों को सौंपी जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से संपत्ति कर और पानी एवं सीवरेज बिलों की बकाया राशि वसूलने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा की। नागरिकों को अपने बकाया राशि जमा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभाग को एकमुश्त निपटान योजना बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने नागरिकों को समय और परेशानी मुक्त सेवाओं के वितरण पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि स्थानीय निकायों द्वारा किए जा रहे कार्यों के दर सूची (कॉटेशन) में पारदर्शिता लाने के लिए सभी नगर निगमों में एक कॉटेशन मैनेजमेंट सिस्टम भी लॉन्च किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि समय की जरुरत को देखते हुए पानी को बचाने पर जोर दिया जाना चाहिए। इसके लिए शहरों में डबल लाइनिंग सिस्टम शुरू किया जाना चाहिए, जिसके तहत उपचारित पानी का दोबारा उपयोग पीने की बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा सके।
निकायमंत्री विज बैठक में नहीं पहुंचे
इस बैठक में हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री को भी भाग लेना था। मगर वे इस बैठक में नहीं पहुंचे। हालांकि उनके बैठक में न आने के कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं। लेकिन माना जा रहा है कि सीएम और निकाय मंत्री अनिल विज के बीच सीआईडी अधिकार को लेकर चल रहे विवाद की वजह से ही विज इस बैठक में नहीं आए।
सीएम की अध्यक्षता वाली बैठक में मेयरों, आयुक्तों के अलावा मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव और शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर, शहरी स्थानीय निकाय विभाग महानिदेशक अमित अग्रवाल, अतिरिक्त निदेशक श्रीमती वर्षा खनगवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।