चंडीगढ़ के सार्वजनिक शौचालयों को चलाने के लिए नगर निगम ने नई नीति तैयार की है। नगर निगम की तरफ शौचालयों को चलाने के लिए एमडब्ल्यूए-आरडब्ल्यूए को 30 हजार की जगह अब हर महीने 52,217 रुपये दिए जाएंगे लेकिन अब शौचालय पर एक महिला-एक पुरुष कर्मी तैनात करना होगा। डीसी रेट देने के साथ पीएफ भी जमा कराना होगा। इसके साथ अगर शौचालय में गंदगी मिलेगी तो 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
कमेटी की बैठक में तय हुआ है कि जिस भी आरडब्ल्यूए और एमडब्ल्यूए की ओर से शौचालय चलाया जा रहा है, उन्हें सार्वजनिक शौचालय पर तैनात कर्मचारियों को डीसी रेट देना होगा। वर्दी और पीएफ भी जमा कराना होगा। हर महीने सात तारीख तक वेतन देना होगा। इसके साथ अन्य श्रम कानूनों का भी पालन करना होगा।
शहर में सार्वजनिक शौचालय को चलाने के लिए नगर निगम हर महीने करीब एक करोड़ रुपये खर्च करता है। इनमें से लाखों रुपये हर महीने कुछ लोगों की जेब में जाते हैं, क्योंकि शहर में कई सार्वजनिक शौचालय ऐसे हैं, जो एक ही आरडब्ल्यूए के पास हैं और वह आरडब्ल्यूए किसी नेता से जुड़ा होता है। कई बार आरोप भी लगे हैं वर्तमान में कुछ पार्षद भी अपने रिश्तेदारों के नाम पर सार्वजनिक शौचालय लेकर चला रहे हैं और क्योंकि वह तैनात कर्मचारी को मनमर्जी का वेतन देते हैं। ऐसे में अधिकतर पैसा उनकी जेब में जाता है लेकिन इन नियमों के बनने से उन्हें झटका लगेगा।
सार्वजनिक शौचालय को चलाने में आरडब्ल्यूए और एमडब्ल्यूए को समस्या न आए, इसे देखते नगर निगम ने प्रति इस्तेमाल पर दो से पांच रुपये वसूलने की इजाजत दे दी है। ये पैसे आरडब्ल्यूए और एमडब्ल्यूए के पास ही रहेंगे। साथ ही अगर शौचालय में सेनेटरी पैड नहीं होगा, डस्टबिन से कूड़ा बाहर गिरा होगा या सफाई नहीं होगी तो 100 से लेकर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यह जिम्मेदारी एरिया के जेई और एसडीई की होगी। तय किया गया है कि अगर शौचालय पर तैनात कर्मचारी किसी के साथ बदतमीजी करता है तो उसे निकालने की छूट होगी। इसके साथ ही सामुदायिक शौचालयों को लेकर भी नियमों में बदलाव किया गया है। जहां भी 20 से कम सामुदायिक शौचालय सीटें होंगी, उन्हें कम से कम हर महीने 20000 रुपये मिलेगा। अगर जहां भी शौचालय सीट 20 से ज्यादा होंगी तो उन्हें 20000 के बाद प्रति शौचालय 1000 रुपये दिया जाएगा।