चंडीगढ़। खून की जांच कर ओरल और किडनी कैंसर के स्टेज के साथ मरीज के सरवाइवल समय का आकलन किया जा सकेगा। इससे चिकित्सा विशेषज्ञों को कैंसर के मरीजों के उचित इलाज और थैरेपी में मदद मिलेगी। यह बात यूआईईटी की डॉ. नीलम गोयल ने सेक्टर-12 स्थित पेक में आयोजित सत्र में व्याख्यान में कही। वे पिछले छह वर्षों से ओरल और किडनी कैंसर में क्लीनिकल और मल्टी-ओमिक्स डाटा एनालिसिस से सर्वाइवल समय पता लगाने पर काम कर रही हैं।
डॉ. नीलम गोयल ने बताया ओमिक्स अर्थात विभिन्न जेनेटिक व अन्य डाटा का विश्लेषण कर कैंसर मरीजों के सर्वाइवल समय का पता लगाया जा सकता है। ओरल कैंसर में उनका अनुमान 99 प्रतिशत सही रहा है। किडनी में भी अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं। डॉ. नीलम ने बताया कि इससे ओरल और किडनी कैंसर के सभी स्तर के मरीजों का इलाज और थैरेपी करने में अधिक मदद मिलेगी। डॉ. नीलम ने यह शोध ग्रामीण क्षेत्रों को मद्देनजर रखते हुए किया है, जहां स्वास्थ्य देखभाल की अधिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। इस पर उनके तीन शोध पत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने यह शोध दिपाली, दीक्षा, अशविंदर के साथ मिलकर की है।
शनिवार को पेक, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में एआईसीटीई की ओर से प्रायोजित छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम संपन्न हो गया। इस कार्यक्रम में 36 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें आईआईटी-रुड़की, आईआईटी-रोपड़, आईआईटी-ऊना, सीएसआईओ-सीएसआईआर, यूआइईटी, पीजीआई के विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। इस दौरान प्रतिभागियों ने सेक्टर 30 स्थित सीएसआईओ-सीएसआईआर का दौरा भी किया।