मिलिए एक ऐसे शख्स से, जिसे उसके काम करने के शौक ने ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इनका नाम है जेपी फर्नीचर के प्रोपराइटर परवेज सैफी। इन्होंने 1995 से लेकर 2007 तक एक फर्नीचर की दुकान पर बतौर कर्मचारी काम किया। हौसलों में उड़ान और मेहनत का जज्बा था।
सैफी ने बताया कि चंडीगढ़ के जैम फर्नीचर में स्वर्गीय पिता इस्लामूदीन 1973 से बतौर फर्नीचर कर्मचारी रहे। पिता की तबियत ठीक ना होने के कारण बड़े भाई जावेद सैफी को भी पढ़ाई छोड़कर 1991 में काम करना पड़ा। 1995 में पढ़ाई छोड़कर खुद भी फर्नीचर का काम सीखने लगे।
2007 तक काम सीखने के बाद पिता और बड़े भाई के सहयोग से पंचकूला में फर्नीचर का काम शुरू किया। अब ट्राइसिटी के टॉप आर्किटेक्ट और इंटीरियर डैकोरेटर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
एक हजार रुपए का पहला आर्डर लिया
परवेज सैफी ने बताया कि जब इंडस्ट्री लगाई तो पहला आर्डर एक हजार रुपए का लिया, जिसमें से छह सौ रुपए एडवांस लेकर लकड़ी खरीदी। इसके बाद कुछ जानकारों से काम लेने लगे। रात के दो-दो बजे तक काम करने के बाद मेहनत रंग लाने लगी। बेहतर काम और लकड़ी की अच्छी क्वालिटी होने के कारण पूरे देश में अपने फर्नीचर की सप्लाई कर चुके हैं।
कई एक्ट्रेस को दे चुके हैं सेवाएं
परवेज के बड़े भाई जावेद सैफी ने बताया कि वह फिल्म एक्ट्रेस तब्बू और करिश्मा रंदेवा के मुंबई निवास में फर्नीचर सप्लाई कर चुके है। इसके अलावा देश के काफी मंत्रियों के घर भी फर्नीचर बनवा चुके है।
प्रोफाइल
परवेज खान, प्रोपराइटर, जेपी फर्नीचर
2007 में लगाई इंडस्ट्री
स्कूलींग सेवन-सी स्कूल, पंचकूला
मेंबर- इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पंचकूला
जावेद सैफी, प्रोपराइटर, जेपी फर्नीचर
स्कूलिंग सेवन-सी स्कूल पंचकूला
मेंबर-इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पंचकूला
यह बनाते है
-बैड
-सोफा
-कुर्सियां
-डाइंनिंग टेबल और फर्नीचर की विभिन्न आइटम्स
युवाओं के लिए टिप्स
- मेहनत
- शौंक से किया काम होता है सफल
- खानापुर्ती नहीं करनी चाहीए, लगन से काम करना चाहीए
- जानकारी भी जरूरी