चंडीगढ़। सिंडिकेट की बैठक नहीं हो रही है। इस वजह से शिक्षकों के तमाम प्रस्ताव लटके हुए हैं। सातवें वेतनमान से लेकर पास्ट सर्विस काउंट के लिए प्रयास जारी हैं, जल्द की सफलता मिलेगी। यह बात पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) में हिस्सा ले रहे मृत्युंजय-नौरा ग्रुप के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार डॉ. मृत्युंजय कुमार ने बुधवार को ऑनलाइन प्रेसवार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि तीन साल से शिक्षकों की हम सेवा करते आ रहे हैं। सिंडिकेट व सीनेट में शिक्षकों के मुद्दे उठाए गए और उन्हें पास करवाने का काम किया है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों का पीएचडी इंक्रीमेंट का लाभ पुटा के जरिए ही मिला है। पास्ट सर्विस काउंट की तकनीकी बाधाएं दूर हो गई हैं। जल्द इसका लाभ शिक्षकों को मिलेगा। कोविड के कारण शिक्षकों को वर्क फ्रॉम होम का लाभ दिलवाया गया। कैश प्रमोशन के लिए धरना देने की चेतावनी के रास्ता साफ हुआ। इसका शेड्यूल जारी हुआ। कोविड के कारण देरी हो रही है, लेकिन शिक्षकों के साक्षात्कार ऑनलाइन करवाने के लिए कहा है। महिला शिक्षकों को सुरक्षित माहौल प्रदान किया गया।
डॉ. मृत्युंजय बोले- ढाई करोड़ रुपये ऑनलाइन शिक्षा के लिए शिक्षकों की सुविधा पर होंगे खर्च
डॉ. मृत्युंजय कुमार ने खुलासा किया कि पुटा का जो ढाई करोड़ रुपये बचा हुआ है उस रकम से ऑनलाइन शिक्षा के लिए शिक्षकों को सुविधाएं दी जाएंगी। वाई-फाई से लेकर सातवें वेतनमान दिलवाया जाएगा। पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने की दिशा में काम करेंगे। शिक्षकों को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाने की बजाय मृत्युंजय कुमार को बनाने के सवाल पर प्रो. राजेश गिल ने कहा कि बेहतर कार्य की बदौलत ही मृत्युंजय कुमार को इसके लिए चुना गया है। शिक्षकों की भी इसमें सहमति है। प्रो. अमरजीत सिंह नौरा ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि रिसर्च को आगे ले जाने के लिए कार्य होगा।
तीन साल में क्या किया.. अब सिंडिकेट की आ रही याद
प्रेसवार्ता में मृत्युंजय-नौरा ग्रुप की ओर से प्रस्ताव लटकने के बताए गए कारणों का खालिद-सिद्धू ग्रुप ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि सिंडिकेट की बैठक की अब याद आ रही है। तीन साल से पुटा में हैं और सिंडिकेट व सीनेट में भी हैं, लेकिन शिक्षकों के लिए क्या किया। कैश प्रमोशन के केस लटके रहे। पास्ट सर्विस काउंट के मुद्दों पर काम नहीं किया। अब सिंडिकेट की बैठक न होने का दोष दिया जा रहा है। शिक्षकों के सामने प्लान रखना चाहिए कि सिंडिकेट की बैठक में यह प्रस्ताव पास होने जा रहे हैं, लेकिन किसी मुद्दे पर काम नहीं किया। केवल शिक्षकों के वोट लिए गए। आरोप-प्रत्यारोप लगाने में ही यह ग्रुप माहिर है।