सोसायटी के चेयरमैन ओमप्रकाश सैनी ने बताया कि निगम की कुछ शर्तें हमने मानी हैं और निगम ने भी कई शर्तें हमारी मान ली हैं। गाड़ियां देने से गारबेज कलेक्टरों को काफी राहत मिली है। अब सेक्टरों में कचरा उठाने के लिए गारबेज कलेक्टर गाड़ी के साथ ही घर-घर जाएंगे। इस दौरान यदि कोई गारबेज कलेक्टर अनुपस्थित रहेगा तो उसकी जगह दूसरे कर्मचारी को भेजा जाएगा।
निगम की शर्त के अनुसार, प्रत्येक गारबेज कलेक्टर की हाजिरी एमओएच को भेजी जाएगी। ओमप्रकाश सैनी ने कहा कि शहर की स्वच्छता हमारे लिए भी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस मौके पर सेनिटेशन कमेटी के अध्यक्ष व भाजपा पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली, सीनियर डिप्टी मेयर हरदीप सिंह, अरुण सूद, भरत शर्मा, हीरा नेगी, रविंदर कौर गुजराल, महेश इंदर सिंह, एडीशनल कमिश्नर एसके जैन, अनिल गर्ग, एमओएच डॉ. एपी सिंह, सोसायटी के प्रधान जय किशन दूल्हा, रमेश सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
2012 में प्रदीप छाबड़ा ने व्यवस्था शुरू करने से कर दिया था मना
सोसायटी के चेयरमैन ओपी सैनी ने बताया कि वर्ष 2012 में यह मामला शुरू हुआ था। तब तत्कालीन मेयर राजबाला मलिक ने पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में यह व्यवस्था शुरू करना चाही थी लेकिन कांग्रेस नेता प्रदीप छाबड़ा ने अपने वार्ड में इस प्रोजेक्ट को शुरू करने से मना कर दिया था। विवाद के चलते गीला और सूखा कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था बन ही नहीं सकी।
2018 से फिर उठा मामला, नहीं साइन हुआ एमओएयू
वर्ष 2018 में ततकालीन मेयर देवेश मोदगिल के समय में फिर से सोसायटी के साथ एमओएयू साइन करने की बात उठी। सदन में एजेंडा पास होने के बाद सोसायटी ने निगम की शर्तें मानने से मना कर दिया। सोसायटी के पदाधिकारियों ने कहा कि निगम की शर्तों में केवल कर्मचारी का शोषण हो रहा है। इसके लिए राजबाला मलिक, अनिल दुबे, महेश इंदर सिंह, भरत शर्मा, फर्मिला, अनिल गर्ग और डॉ. एपी सिंह की एक कमेटी बनी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
राजेश कालिया के मेयर बनने के बाद गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने का मामला फिर से उठा। चूंकि कालिया पहले से सोसायटी के सदस्यों की पैरवी करते रहे हैं, इसलिए सोसायटी के पदाधिकारियों को भी उनसे काफी उम्मीद थी। सोसायटी के पदाधिकारियों ने लगातार बैठक की, अंत में कालिया ने दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाई। सोसायटी के लोगों का कहना है कि पंचकूला व मोहाली में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन समय के अनुसार हम भी बदलाव करने को तैयार हैं।
निगम से इन मुद्दों पर था विवाद
- कर्मचारी निगम के अंतर्गत काम करेंगे
- सोसायटी को गाड़ी खरीदनी होगी
- कचरा निगम का होगा, कर्मचारियों को बस सैलरी मिलेगी
- सोसायटी रजिस्टर्ड करानी होगी
- कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर निगम फैसला लेगा
सोसायटी के पदाधिकारियों ने कहा
- निगम के अंतर्गत काम करने पर मात्र 13 से 14 हजार सैलरी मिलेगी
- गारबेज कलेक्टर गाड़ी खरीदने में सक्षम नहीं हैं
- निगम को कचरा देने से गारबेज कलेक्टरों को कुछ नहीं मिलेगा
- सोसायटी रजिस्टर्ड कराने से टैक्स देना होगा, जो संभव नहीं
- इससे कर्मचारियों का शोषण होगा, इसका अधिकार सोसायटी को दें
गीला-सूखा कचरा अलग-अलग न करने की व्यवस्था से शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। स्वच्छता में रैंकिंग में कचरा सेग्रीगेशन के ही ज्यादा नंबर होते हैं। पिछली स्वच्छता रैंकिंग में चंडीगढ़ तीसरे से 20वें स्थान पर फिसल गया था। वर्ष 2020 की रैंकिंग जारी होने को है इसलिए निगम के अधिकारियों की चिंता भी बढ़ रही थी।
यह मेयर कार्यकाल के लक्ष्य में से एक था। आज एक और लक्ष्य पूरा हुआ। शहर की स्वच्छता का वादा मैंने मेयर बनने के बाद किया था। अब मिलकर शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाएंगे। राजेश कालिया, मेयर
दो साल से चल रहे विवाद पर आज विराम लग गया। हमारी मांगों को सही मानते हुए पार्षद और अधिकारियों ने सहमति जताई है। इसलिए एमओयू भी साइन कर लिया है। अब शहर को साफ रखने के लिए एकजुट होकर काम करें। -ओमप्रकाश सैनी, चेयरमैन, डोर टु डोर कचरा कलेक्शन सोसायटी