बेमिसाल ये परिवार, 4 पीढ़ियों की सास-बहुएं
बिखरते परिवारों और सास-बहुओं के टूटते रिश्ते के बीच बेदी परिवार की चार पीढ़ियां मिसाल बनी हैं, इनके बीच मां बेटी जैसा प्यार है। ये परिवार समाज के लिए एक नजीर है। प्यार, समर्पण और त्याग की एक तस्वीर है। इकबाल कौर ने अपने संस्कारों से इस परिवार को सींचा है। इसी का परिणाम है कि एक ही छत के नीचे अलग-अलग विचारधाराएं होते हुए भी एकजुट होकर चार पीढ़ियों की सास-बहू एक साथ रह रही हैं।
तीनों के बीच रिश्ता तो सास- बहू का है लेकिन प्यार मां जैसा है। इकबाल कौर 96 साल की हैं। उम्रदराज के कारण उनकी बहू गुरकीरत कौर उनका ध्यान रखती हैं। गुरकीरत की बहू मीनाक्षी 35 साल की हैं। वे वर्किंग वुमन हैं। उनका 13 साल का बेटा है और 11 साल की बेटी है। मीनाक्षी कहती हैं कि तीनों के बीच जेनरेशन गैप है। इसकी वजह से कई बार विचार नहीं मिलते, लेकिन दिल मिलते हैं। बच्चों के लिए वे कई बार चाइनीज फूड बनाती हैं।
वे बच्चों को तो खिलाती हैं साथ ही अपनी दादी सास को भी देती है। चाइनीज फूड को देखकर दादी सास बोलती हैं कि आज के जमाने में क्या-क्या बनने लगा है। लेकिन जब वे इसे खाती हैं तो बहुत ही चाव से खाती हैं। इकबाल ने बताया कि मीनाक्षी का खाना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। जब मीनाक्षी अपनी फैक्टरी में जाती हैं तो उनकी गैरहाजिरी में उनके बच्चों को खाना खिलाना और उन्हें संभालने की जिम्मेदारी गुरकीरत कौर के पास रहती है।
मीनाक्षी ने बताया कि उनकी सास में धैर्य बहुत है और वे बहुत ही मेहनती भी हैं। गुरकीरत कौर से जब ओल्ड एज होम के बारे में राय पूछी गई तो उन्होंने साफ कह दिया है कि पैरेंट्स भले ही बूढ़े हो जाएं, वे हमारे मां-बाप ही रहते हैं। उन्होंने कहा वे ऐसे लोगों से साफ नफरत करती हैं, जो अपने अभिभावकों को ओल्ड एज होम में भेज देते हैं।