पंजाब में सबसे ज्यादा घातक और छोटे-मोटे सड़क हादसे ग्रामीण इलाकों में होते हैं, जबकि शहरी इलाके इस मामले में थोड़े पीछे हैं। सबसे अधिक लोगों को इसी इलाके में अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। यह बात पंजाब पुलिस की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट 2021 में सामने आई है। इस दौरान ग्रामीण एरिया में 59 फीसदी और शहरी एरिया 41 फीसदी हादसे हुए।
वहीं, एक बात यह भी चौंकाने वाली सामने आई है कि सड़कों पर प्रति एक लाख लोगों को संभालने की जिम्मेदारी मात्र आठ मुलाजिमों पर है। इसके अलावा 62 हाईवे पैट्रोलिंग पार्टियां ब्लैक स्पॉट के नजदीक तैनात की गई हैं। हालांकि माहिरों की माने तो ग्रामीण एरिया में हादसे होने की कई वजह हैं। एक तो सड़कें ठीक नहीं हैं। दूसरा रोड इंफ्रास्ट्रक्चर भी उचित नहीं है। इसके साथ ही कट व अन्य चीजें भी लोगों पर भारी पड़ रही हैं।
नेशनल हाईवे पर सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट
पंजाब में 784 ब्लैक स्पॉट हैं। नेशनल हाईवे पर सबसे ज्यादा 545, स्टेट हाईवे पर 128, एमसी रोड पर 64, मेजर डिस्ट्रिक रोउ पर 21, अन्य जिला सड़कों पर 12, ग्रामीण सड़कों पर 14 ब्लैक स्पॉट है। जबकि जिला क्रमवार देखा जाए तो वीआईपी जिले मोहाली में सबसे अधिक 92 ब्लैक स्पॉट हैं, जबकि अमृतसर रूरल छह ब्लैक स्पॉट हैं।
हालांकि सभी जिलों में ब्लैक स्पॉट सुधारने की दिशा में काम चल रहा है। इसमें पीडब्ल्यूडी, नेशनल हाईवे अथॉरिटी और मंडी बोर्ड मिलकर काम कर रहे हैं। हालांकि ग्रामीण एरिया में सड़क सुधारने पर फोकस किया जा रहा है। लिंक सड़कों तक को सुधारने की दिशा में काम चल रहा है। कई इलाकों में सड़कों को नौ से 18 फुट तक चौड़ा कर दिया गया है।
सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 82 फीसदी पुरुष
राज्य में होने वाले सड़क हादसों में कुल 4589 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इनमें 83 फीसदी पुरुष व 17 फीसदी महिलाएं हैं। इस दौरान 3831 पुरुष व 758 महिलाओं ने अपनी जान गंवाई। 18 से 45 साल आयु वर्ग के 70 फीसदी लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। सुबह छह से दस बजे तक दस फीसदी, नौ से 12 बजे तक 11 फीसदी, 12 से तीन बजे तक 12 फीसदी, तीन से छह बजे तक 15 फीसदी, छह से नौ बजे तक 21 फीसदी, नौ से 12 बजे तक 14 फीसदी, रात 12 से तीन बजे तक सात फीसदी, तीन से छह बजे तक 7 फीसदी हादसे होते हैं। रोड सेफ्टी वॉलंटियर कुलदीप सिंह का कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब में सुविधाओं का स्तर काफी बढ़िया है। फिर कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।