पता चला है कि बैठक में अपने-अपने विचार रखते हुए अधिकांश नेताओं का कहना था कि बीते डेढ़ साल के दौरान आप सरकार ने पंजाब में जिस तरह कांग्रेस को कुचलने का प्रयास किया है, पार्टी नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किए हैं और विजिलेंस कार्रवाई की गई है, उसे देखते हुए इस पार्टी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता।
बैठक के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने बताया कि पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी, विधायक, पूर्व विधायक और बाकी नेताओं ने इस बैठक में आप से गठजोड़ को लेकर जो भी राय रखी है, उस पर एक रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को सौंपी जाएगी। बैठक में कई अन्य एजेंडे भी थे, जिनमें आप से गठजोड़ के मुद्दे के अलावा पंजाब के मौजूदा सियासी हालात, ड्रग के बढ़ रहे मामले, कानून-व्यवस्था की स्थिति और किसानों व मुलाजिमों के मुद्दों पर आप सरकार के रवैये पर विचार-विमर्श किया गया।
26 सितंबर को बेंगलुरु में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और सीएलपी नेताओं को आमंत्रित किया गया है, जिसमें वे अपनी विस्तृत रिपोर्ट और राय हाईकमान के समक्ष रखेंगे। आप से गठजोड़ के मुद्दे पर बाजवा से उनकी निजी राय पूछे जाने पर उन्होंने इतना ही कहा कि इस मुद्दे पर मेरी राय हर कोई जानता है।
उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस के नेताओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया है, उससे यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस की आप के साथ जुड़ने की कोई इच्छा नहीं है। आप नेता हरपाल चीमा के वे बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के साथ छोटे-मोटे मनमुटाव दूर कर लिए जाएंगे। इस पर बाजवा ने कहा कि यह चीमा की राय हो सकती है लेकिन यह हमारी राय नहीं है। कोई भी रिश्ता एक तरफा राय से नहीं बनता, दोनों पक्षों की समान राय जरूरी है।