फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा मार्मिक पत्र, 'पुलिस करती तंग, खाने को रोटी नहीं'

Thu, 14 Mar 2019 10:34 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोरनी(हरियाणा)
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विज्ञापन
एक सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट को बेहद मार्मिक पत्र लिखा है। इसकी एक कॉपी पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट को भी सौंपी गई। पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामला चंडीगढ़ का है और मोरनी सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता ने पंचकूला पुलिस की शिकायत करते हुए पत्र लिखा। इसमें उसने पुलिस पर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। साथ ही मामले में उसके पति को ही आरोपी बनाने की शिकायत की है। बुधवार को पीड़िता पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट पहुंची और पत्र की प्रति जज को सौंप दी।
विज्ञापन


पत्र में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद से ही पुलिस उसे लगातार परेशान कर रही है। घटना के समय भी पंचकूला पुलिस ने केस नहीं दर्ज किया था। चंडीगढ़ पुलिस ने केस दर्ज किया और उसे पंचकूला को ट्रांसफर कर दिया था। पीड़िता ने कहा कि आरोपी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग हैं। उन्हें बचाने के लिए पुलिस ने उसके पति को पीड़िता से धंधा करवाने का आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया। उसके पति अभी भी जेल में ही हैं। पीड़िता ने कहा कि उसके पति ही घर में एकमात्र कमाने वाले थे। उनके जेल में रहने से वह दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हो गई।

खामियों से भरी थी मामले की जांच: डीजीपी

हरियाणा के डीजीपी ने मान लिया है कि मोरनी सामूहिक दुष्कर्म केस की जांच खामियों से भरी थी। उन्होंने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि जांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही जांच के लिए नए सिरे से एसआईटी भी गठित कर दी गई है। डीजीपी मनोज यादव आदेश के अनुरूप बुधवार को हाईकोर्ट में पेश हुए। उन्होंने हाईकोर्ट को बताया कि मामला उनके संज्ञान में आने के बाद उन्होंने पंचकूला पुलिस कमिश्नर को जांच की स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए थे। पुलिस कमिश्नर ने उन्हें जो रिपोर्ट सौंपी, उससे साफ हो गया कि केस की जांच में बहुत सारी खामियां थीं। केस के 40 आरोपियों में से केवल 12 को ही गिरफ्तार किया जा सका है। इनमें से 8 की शिनाख्त व्हाट्सएप के जरिए करवाई गई।

तत्कालीन डीएसपी और एसीपी से जवाब मांगा
डीजीपी ने बताया कि यह जांच अधिकारियों की लापरवाही थी। उन्होंने पंचकूला के तत्कालीन डीसीपी राजेंद्र कुमार मीणा और एसीपी (अंडर ट्रेनिंग) डॉ अंशु सिंगला से इस पूरे मामले की जांच में लापरवाही बरतने, केस डायरी सही तरह से मेनटेन न करने, 40 में से सिर्फ 12 आरोपियों को गिरफ्तार करने और बचे आरोपियों की गिरफ्तारी के गंभीर प्रयास न करने, आरोपियों की शिनाख्त के लिए आईडेंटिफिकेशन परेड न करवाने और सीसीटीवी फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजे जाने पर जवाब मांगा है।
विज्ञापन

एसएचओ, इंस्पेक्टर और एसआई के खिलाफ विभागीय जांच

डीजीपी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर पंचकूला की इंस्पेक्टर राजेश कुमारी, एसआई भगवान दास और चंडीमंदिर के तत्कालीन एसएचओ राम कुमार के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। वहीं मामले की नए सिरे से जांच के लिए एसीपी कालका पवन कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है।

दो नाबालिग आरोपियों की गिरफ्तारी
डीजीपी ने बताया कि 8 मार्च को इस मामले में दो नाबालिगों को गिरफ्तार करके जुवेनाइल बोर्ड के समक्ष पेश किया गया था। इनका मेडिकल करवाकर ब्लड सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए भेज दिए गए हैं। इन दोनों की आईडेंटिफिकेशन परेड के लिए जुवेनाइल बोर्ड के समक्ष अर्जी भी दी गई है। शिनाख्त के तरीके को लेकर घिरी पुलिस ने हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक को पत्र लिख ट्रेनिंग ले रहे अधिकारियों को आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) कैसे करवाई जाए, इसकी विशेष ट्रेनिंग देने के आदेश दिए हैं।

यह है मामला
मामले में आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके कहा था कि उसका नाम एफआईआर में नहीं था और न ही पीड़ित या अन्य किसी भी आरोपी ने उसका नाम लिया। केवल होटल मालिक के कॉल रिकॉर्ड के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। पीड़िता से व्हाट्सएप पर फोटो दिखाकर शिनाख्त करवाई जा रही है। जबकि कानूनी प्रावधान के तहत व्हाट्सएप के जरिये शिनाख्त करवाए जाने का कोई नियम ही नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने डीजीपी को तलब कर मामले पर जवाब मांगा था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें