चंडीगढ़ में 700 से अधिक शिक्षक आठ साल से बिना इनक्रीमेंट, चाइल्ड केयर लीव और अन्य वित्तीय लाभ के काम कर रहे हैं। इनमें 2015 की 1140 नियमित पदों के तहत हुई भर्ती के शिक्षक हैं, जो न तो नियमित और न ही कॉन्ट्रैक्चुअल अध्यापकों की श्रेणी में आते हैं। 700 से अधिक जेबीटी और टीजीटी पद पर तैनात शिक्षक अन्य अध्यापकों के जितना ही काम कर रहे हैं बस फर्क इतना है कि यह आठ सालों से प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। करीब 300 शिक्षक नौकरी छोड़ कर भी जा भी चुके हैं।
केस 1
समझ नहीं आता कि विभाग में हैं या नहीं
नाम न बताने की शर्त पर एक टीजीटी शिक्षक ने बताया कि काम करते हुए बाल सफेद हो गए हैं लेकिन अब भी समझ नहीं आता कि हम विभाग का हिस्सा हैं या नहीं। हर वक्त एक अनिश्चितता की तलवार सिर पर लटकी रहती है कि कहीं नौकरी चली न जाए। परीक्षा पास करने पर नौकरी ली थी लेकिन किसी के नकल करने की सजा हमें क्यों दी जा रही है।
मानसिक रूप से थक चुके हैं
नाम न बताने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि शिक्षा विभाग का कोई ऐसा अधिकारी नहीं जिसके पास हम प्रोबेशन पीरियड क्लीयर करवाने के लिए न गए हों। इस साल अप्रैल माह में विभाग को एप्लिकेशन देकर आए थे लेकिन अभी तक उसका कोई जवाब नहीं मिला। सब मौखिक रूप से प्रोबेशन क्लीयर करने की हामी भर देते हैं लेकिन लिखित में कोई काम नहीं हो रहा। मानसिक रूप से हम थक चुके हैं।
अपनी लड़ाई पूरी लड़ेंगे
अभी मेरे साथ 2015 में नियुक्त हुए 537 शिक्षक सक्रिय रूप से जुड़े हैं। सभी शिक्षक अपनी योग्यता के आधार पर नियुक्त हुए हैं। हालांकि 300 के करीब शिक्षक प्रशासन से निराश होकर नौकरी छोड़ चुके हैं लेकिन न्याय के लिए हमारा संघर्ष जारी है। - भवतरण सिंह, 2015 भर्ती में नियुक्त शिक्षकों के प्रतिनिधि
मामला स्टेंडिंग काउंसिल के पास लंबित
कोर्ट में मामला जाने से शिक्षकों का प्रोबेशन पीरियड क्लीयर नहीं हो पाया है। शिक्षकों के मुद्दे को लेकर स्टेंडिंग काउंसिल के पास मामला भेजेंगे। स्टेंडिंग काउंसिल के निर्देशानुसार इस पर निर्णय लेंगे। - हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक