चंडीगढ़ में मेट्रो पर ब्रेक लगने के बाद मोनो रेल चलाने का प्रोजेक्ट प्रशासनिक फाइलों में दौड़ रहा था। लेकिन एडवाइजर मनोज परिदा के आने के बाद से यह कवायद दोबारा शुरू हो गई है। इस बार उम्मीद है कि प्रशासन का प्रयास रंग लाएगा। इसके लिए मंगलवार को एक प्राइवेट कंपनी की तरफ से प्रेजेंटेशन दी गई, जिसमें एडवाइजर समेत प्रशासन के आलाधिकारी मौजूद रहे। शहर में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए प्रशासन की ओर से विकल्प तलाशे जा रहे हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट रिजेक्ट हो जाने के बाद सिटी में मोनो रेल चलाने पर अक्सर चर्चा होती रही है।
इसी क्रम में मंगलवार को प्रेजेंटेशन देते हुए एक प्राइवेट कंपनी की तरफ से कहा गया कि अगर मोनो रेल चलाई जाती है तो खर्र्च मेट्रो से काफी कम आएगा। मेट्रो प्रोजेक्ट पर करीब 14 हजार करोड़ रुपये खर्च आ रहा था जबकि मोनो रेल चलाने पर 3500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कंपनी ने कहा कि जो भी खर्चा आएगा, वह यूटी गवर्नमेंट को ही उठाना होगा लेकिन प्रशासन अभी इतना खर्च उठाने का जोखिम नहीं उठा सकता है। प्रेजेंटेशन के मुताबिक, मोनो रेल के लिए सिंगल ट्रैक एलिवेटेड होंगे। खरड़, जीरकपुर, पंचकूला और मुल्लांपुर के करीब 18 से 20 किलोमीटर के एरिया की कनेक्टिविटी होगी। एक टाइम में 8000 से 10 हजार लोग ट्रेवल कर सकेंगे। करीब 150 से 200 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर का खर्चा आएगा। मोनो रेल बिजली से चलेगी।
ऐसे कागजों पर दौड़ रही है रेल
2005 में प्रशासन ने मोनो रेल चलाने के प्रपोजल को रिव्यू किया। 2006 में पंजाब-हरियाणा सरकार से मीटिंग्स हुईं। इस दौरान मेट्रो पर भी विचार शुरू हो गया। 2009 में राइट्स की रिपोर्ट आई कि मेट्रो ही बेहतर रहेगी। 177 मीटिंग्स हुईं। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन ने सर्वे किया। करीब 10 करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन 2017 में मेट्रो प्रोजेक्टर पर ब्रेक लगा। एमपी विरोध कर रही थीं और बाद में होम मिनिस्टर ने भी कह दिया कि मेट्रो फिजिबल नहीं है। 2017 में फ्रांस की एजेंसी ने भी मेट्रो को चंडीगढ़ के लिए फायदेमंद नहीं बताया।
प्रोजेक्ट से क्या होगा फायदा
चंडीगढ़ प्रशासन को बीते साल केंद्र की ओर से सुझाव दिया कि वे पहले ये देखें कि चंडीगढ़ में ट्रांसपोर्टेशन को लेकर समस्या है क्या। जब तक समस्या समझ नहीं आएगी, तब तक कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट लाने का फायदा नहीं है। प्रशासन की तरफ से अब कंपनी को इस पर स्टडी करने के लिए भी कहा गया है। जिसके बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। केंद्र ने यह सुझाव सितंबर 2018 में एक कंपनी का प्रजेंटेशन होने के बाद दिया था। तब से इस नए सिरे से काम चल रहा था।
पंचकूला और मोहाली से नहीं मिल रहा सपोर्ट
शहर में मोनो रेल चलाने को लेकर यूटी का ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट कई बार पंचकूला और मोहाली को लिख चुका है, क्योंकि शहर में मोनो रेल चलाना इन दोनों के सहयोग कि बिना संभव नहीं है लेकिन कई बार पत्राचार होने के बाद भी दोनों ने अपना और रुख स्पष्ट नहीं किया है। इसके चलते अभी शहर में मोनो रेल चलना संभव नजर नहीं आ रहा है लेकिन प्रशासन की मानें तो अबकी बार मोनो रेल चलाने को लेकर कुछ रिजल्ट जरूर निकलेगा।
डिपो होल्डरों संग भी एडवाइजर ने की बैठक
चंडीगढ़। एडवाइजर मनोज परिदा ने मंगलवार को डिपो होल्डरों से उनकी मांगों के संबंध में बैठक की। इस दौरान डिपो होल्डरों ने एडवाइजर के सामने उन्हें नौकरी देने की मुख्य मांग रखी। एडवाइजर ने उनकी इस मांग सहित अन्य मांगों को गौर से सुना और आश्वासन दिया कि जो पूरी हो सकेंगी, उन पर गौर किया जाएगा।