मोगा में मां-बेटी से छेड़छाड़ के बाद उन्हें चलती बस से फेंक दिए जाने की घटना पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा है कि सरकार ने पीड़ित परिवार को मुआवजा राशि और सरकारी नौकरी किस नीति के तहत घोषित की है।
इस पर पंजाब के एडवोकेट जनरल द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई तय कर दी।
हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस लीसा गिल की डिविजन बेंच ने बुधवार को राज्य सरकार से सवाल किया कि किस नीति के तहत पीड़ित परिवार को 24 लाख रुपये की वित्तीय मदद और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की पेशकश की गई।
बेंच ने एडवोकेट जसदीप सिंह बैंस द्वारा इस मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर गत 19 मई को पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर को नोटिस जारी किया था।
इस पर दोनों की ओर से एक एफिडेविट भी दाखिल किया गया है। दरअसल उक्त वारदात में चलती बस से फेंके जाने के कारण बेटी की मौत हो गई थी जबकि उसकी मां गंभीर रुप से घायल हुई थीं। यह बस ओरबिट एविएशन ट्रांसपोर्ट कंपनी की थी, जिसका मालिकाना हक बादल परिवार केपास है।
अदालत ने पंजाब सरकार से राज्य में चल रही सभी निजी बसों के मालिकों और हिस्सेदारों का ब्योरा भी तलब किया था। यह भी पूछा गया है कि बीते एक साल के दौरान निजी बस आपरेटरों के खिलाफ कितने मामले दर्ज किए गए थे। साथ ही ओरबिट एविएशन की बीते पांच सालों की बैलेंस शीट भी हाईकोर्ट ने सरकार से तलब की थी।
डिविजन बेंच ने पंजाब केएडवोकेट जनरल से उक्त वारदात के बारे में मोगा जिले के वाघापुराना पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर की कापी भी कोर्ट में जमा कराने केआदेश दिए गए थे।