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मोगा पासपोर्ट घोटाला, 24 पुलिस कर्मियों के गिरफ्तारी वारंट जारी

Wed, 15 Feb 2017 01:35 AM IST
दविंदर पाल सिंह/अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
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- फोटो : File Photo
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थाना सिटी में करीब साढ़े 8 साल पहले पुलिस मुलाजिम की शिकायत पर दर्ज पासपोर्ट घोटाला के मामले में पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान लग गया है। केस की जांच से जुड़े करीब 6 एसपी एवं डीएसपी समेत 24 पुलिस अफसरों और मुलाजिमों के अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। ये पुलिस अफसर कई बार तलब किए गए, लेकिन वे गवाही के लिए पेश नहीं हुए। 
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जिला पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओविंग) इंचार्ज देविंदर सिंह ने गिरफ्तारी वारंट जारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कुछ पुलिस अफसरों की गवाही हो चुकी है और कुछ की रहती है। उन्होंने बताया कि इस केस की अगली सुनवाई के लिए 27 फरवरी तय है। 

इस घोटाले की सुनवाई पहले जिला जज की अदालत में होती थी, लेकिन केस की सुनवाई के दौरान पुलिस की गलतियों व अन्य सबूतों की कमी से जिला अदालत ने सरकारी मुलाजिमों पर लगी भ्रष्टाचार की धारा भी खत्म कर दी। इस केस की अगली सुनवाई के लिए निचली अदालत में भेज दिया गया था। अब इस केस की सुनवाई एडिशनल चीफ जुडिशियल मैजिस्ट्रेट की अदालत में चल रही है।
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इस केस की जांच से जुड़े छह सीनियर पुलिस अफसरों समेत 24 पुलिस मुलाजिम अदालत की ओर से बार बार तलब किए गए, लेकिन वे गवाही के लिए पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने इन पुलिस अफसरों व अन्य के गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। इनमें से बहुत से पुलिस अफसरों की तैनाती भी जिला मोगा में ही है। इन पुलिस अफसरों व अन्य के गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस अफसर अदालत में हाजिर नहीं हुए।
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पुलिस कार्रवाई पर सवाल, गवाही से टालमटोल कर रहे अधिकारी

- फोटो : File Photo
अदालत ने इन पुलिस अफसरों व अन्य को पहले 25 जनवरी और दोबारा 9 फरवरी को पेश होने के लिए समन जारी किए थे। समन पहुंचाने की जिम्मेदारी जिला पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओ विंग) और समन स्टाफ को सौंपी गई थी। जिन पुलिस अफसरों के समन जारी हुए थे, उनमें एक एसपी और डीएसपी के अलावा इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर और एएसआई रैंक के 18 पुलिस कर्मी जिला मोगा में ही तैनात होने के बावजूद अदालत के समन उन तक नहीं पहुंच सके।

यह एफआईआर जिला पुलिस की पासपोर्ट शाखा में तैनात तत्कालीन पुलिस मुलाजिम अब आनरेरी एएसआई सतपाल सिंह की शिकायत पर इसी शाखा में तैनात हवलदार गुरदयाल सिंह, रणजीत सिंह और जसविंदरपाल सिंह आदि के खिलाफ दर्ज की गई थी। उनको विभाग ने बाद में नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। शिकायतकर्ता पुलिस कर्मी ने आरोप लगाया था कि उक्त बर्खास्त हो चुके पुलिस मुलाजिमों की मिलीभगत से होशियारपुर, गुरदासपुर आदि दूसरे जिलों के सैकड़ों लोगों की ओर से जाली दस्तावेजों जन्म सर्टिफिकेट, राशन कार्ड तैयार कर स्थानीय गांधी रोड के अलावा पास के गांव दुनेके एड्रेस पर पासपोर्ट जारी करवा कर विदेश में उड़ान भरने का पर्दाफाश किया था। इस घोटाले बाद विभाग ने इन तीनों पुलिस मुलाजिमों को विभाग ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।    
      
इस घोटाले के लिए स्थापित विशेष जांच टीम की ओर से साल 2002 से 2008 तक 795 पासपोर्ट फाइलों की जांच के दौरान 398  पासपोर्ट जाली दस्तावेजों से जारी होने की पुष्टि हुई थी। इस केस में चंडीगढ़ की 14 प्रमुख ट्रेवल एजेंसियों के संचालक, 6 ट्रेवल एजेंट, क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर के कर्मी, पोस्टमैन और स्थानीय सिविल सर्जन दफ्तर की जन्म मृत्यु शाखा क्लर्क ओर तकरीबन 18 महिलाओं समेत 103 मुलाजिम गिरफ्तार किए गए। इस दौरान पुलिस ने अपनी जांच में 11 कर्मियों को क्लीन चिट दे दी और केस की सुनवाई दौरान लगभग 12 मुलाजिम जो एनआरआई थे, भगोड़े हो गए। 
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