किरण खेर की जीत से एक बात तो तय हो गई है कि इस बार पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल के खिलाफ शहर के निवासियों में बाहरी रोष था, इसलिए बंसल बाहरी उम्मीदवार से हार गए।
ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी बाहरी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। इसी के साथ ही भाजपा नेताओं में चर्चा शुरू हो गई है कि शहर के कई नेताओं को सरकार बनने के बाद सम्मान जनक पद दिए जाएंगे।
किरण खेर की जीत में सबसे ज्यादा अहम बने हरमोहन धवन को गवर्नर बनाने की चर्चा शुरू हो गई है। इसके साथ ही सत्यपाल जैन का भी राज्यसभा सांसद बनना तय माना जा रहा है। जबकि रजना शाही को भी अहम पद मिलने की चर्चा है।
धवन की गवर्नर बनने की चर्चा
धवन करीबियों का मानना है कि हरमोहन धवन का नाम टिकट के लिए फाइनल हो गया था, लेकिन गुटबाजी केकारण किरण खेर को मैदान में उतारा गया। इस पर जब धवन नाराज हो गए तो धवन को राष्ट्रीय सेवक संघ की ओर से मनाया गया। सूत्रों का कहना है कि धवन को उसी समय गवर्नर बनाने का आश्वासन दे दिया गया था।
जब शहर में मोदी की रैली हुई तब भी नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में सबसे पहला नाम धवन का लिया और उन्हें सरकार बनने के बाद गांधी नगर आकर मिलने के लिए कहा था। इसके बाद ही यह संभावनाएं तेज हो गई थी कि धवन को गवर्नर बनाया जाएगा।
जैन को राज्य सभा सांसद बनाने की चर्चा
वहीं किरण खेर को टिकट दिलवाने में सत्यपाल जैन ने अहम रोल अदा करते हुए दावा किया था कि वह खेर को जीता कर भेजेंगे ऐसे में जैन का हाई कमान में अच्छे संबंध है। जैन के करीबियों का तो यहां तक कहना है कि जैन को राज्य सभा सांसद बनाने के साथ साथ कानून राज्य मंत्री भी बनाया जा सकता है।
रंजना शाही को भी मिल सकता है अहम पद
देश भर में नरेंद्र मोदी की जीत के बाद अब भाजपा की वरिष्ठ नेता रजना शाही को भी सरकार में अहम पद मिलने की चर्चा बढ़ गई है। रजना शाही को नरेंद्र मोदी के काफी करीबी माना जाता रहा है।
जब मोदी चंडीगढ़ के साथ पंजाब व हरियाणा के प्रभारी थे तो रजना शाही मोदी के करीब आ गई थी। जब नरेंद्र मोदी शहर में लोकसभा चुनाव के दौरान रैली करने के लिए आए थे तो एयरपोर्ट सिर्फ रजना शाही से ही मिलने के लिए गए थे।
किरण खेर का मंत्री बनना तय
भाजपा की स्थानीय इकाई का मानना है कि किरण खेर ने पूर्व रेल मंत्री जैसे कदवार नेता को हराया है ऐसे में खेर का मंत्री बनना तय माना जा रहा है। जबकि ऐसा भी माना जा रहा है कि कई स्थानीय नेताओं पर गाज भी गिर सकती है जिन्होंने खेर को हरवाने के लिए प्रयास किया। ऐसे करीब आधा दर्जन नेताओं का नाम सामने आ रहा है।
कोट्स
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का कहना है कि उनका सिर्फ एक टारगेट था कि पवन बंसल से लोगों को निजात दिलवाना। उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी पद का लालच नहीं किया है। शहर का हित उनके लिए सर्वोच्च है और अब प्रशासन से शहरवासियों की हर समस्याएं को दूर करवाया जाएगा। अब अधिकारियों को शहर के हितों के लिए काम करना होगा।