लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ से कांग्रेस के उम्मीदवार पवन कुमार बंसल की हार का आभास कांग्रेस के नेताओं को पहले से था, लेकिन बंसल इतने ज्यादा अंतर से हारेंगे इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
तीन बार शहर से लगातार चुनाव जीत रहे बंसल के चुनाव हारने का कारण जहां देश में मोदी की लहर रहा, वहीं शहर के विभिन्न वर्गों के लोगों की बंसल के प्रति नाराजगी, कांग्रेस के अंदर फूट और रेल घूस कांड भी उनकी हार का कारण बने।
भाजपा के इस बार एतिहासिक जीत दर्ज करने का मुख्य कारण स्थानीय तीन नेताओं की जगह बाहरी उम्मीदवार किरण खेर को टिकट देना रहा। भाजपा के स्थानीय नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही आंतरिक फूट के कारण भाजपा पिछले तीन लोकसभा चुनावों से चंडीगढ़ सीट नहीं जीत पा रही थी।
हाईकमान को इस बात का अहसास था और यही वजह रही कि भाजपा ने किरण खेर को चंडीगढ़ से चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया और इसमें सफलता भी मिली। भाजपा के इन तीन स्थानीय नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए खेर का साथ दिया और उन्हें चंडीगढ़ का सांसद बनवाया। सत्यपाल जैन, हरमोहन धवन और संजय टंडन ने किरण खेर का साथ दिया।
कांग्रेस के अंदर थी फूट
चंडीगढ़ के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए 1 जनवरी को हुए चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों की सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर जीत से ही यह स्पष्ट हो गया था कि कांग्रेस के अंदर भी फूट शुरू हो गई है।
शहर में जहां जहां कांग्रेस मजबूत थी वहां भाजपा को वोट मिले। कांग्रेस के पार्षदों के इलाकों में भी भाजपा ने पकड़ बनाई। बंसल जब तक रेल मंत्री थे तब तक चंडीगढ़ कांग्रेस में सब कुछ ठीक था, लेकिन रेल घूस कांड में बंसल का नाम आने के बाद कई वरिष्ठ स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी थी।
इसे देखते हुए बंसल ने लोकसभा चुनाव में सभी वार्डों में प्रचार के नेतृत्व की जिम्मेदारी अपने रिश्तेदारों को दी, लेकिन इसका भी उन्हें नुकसान हुआ। टिकट को लेकर भी कांग्रेस के नेताओं के बीच घमासान देखने को मिला।
हार में यूटी प्रशासन का भी काफी हाथ
बंसल की इस बार की हार में यूटी प्रशासन का भी काफी हाथ रहा है। कर्मचारियों से संबंधित मुद्दे हों या व्यापारियों के। सीएचबी के लोगों की समस्याएं हों या शहर के अन्य लोगों की। इन मांगों को प्रशासन ने पूरा नहीं किया।
व्यापारी या कर्मचारी बंसल से मिलते रहे। बंसल ने इन मांगों को पूरा कराने की काफी कोशिशें भी कीं, लेकिन प्रशासन के अड़ियल रवैये के कारण यह मांगे पूरी न हो सकीं। इससे बंसल से विभिन्न वर्गों के लोगों की नाराजगी भी जाहिर थी।
चंडीगढ़ से भाजपा की टिकट के लिए सत्यपाल जैन, हरमोहन धवन और संजय टंडन दावेदार थे। भाजपा हाईकमान का यह मानना था कि इनमें से अगर किसी एक को टिकट मिलती तो भाजपा की हार निश्चित है। ऐसे में भाजपा ने यह मंथन शुरू किया कि बाहर से किसे टिकट दी जाए। सत्यपाल जैन भाजपा हाईकमान को यह समझाने में सफल रहे और किरण खेर के नाम का प्रस्ताव लाया गया। भाजपा की इस समझदारी का लाभ यही रहा कि भाजपा ने सीट जीत ली।