यमुनानगर की नई यूनिट के निर्माण में 233 एकड़ भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा। इस परियोजना की समयसीमा 52 महीने रखी गई है, जबकि वाणिज्यिक संचालन 48 महीनों के अंदर यानी मार्च, 2029 तक शुरू हो जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को दस हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने यमुनानगर के दीनबंधु छोटूराम थर्मल पावर प्लांट में करीब 8469 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली 800 मेगावाट की तीसरी इकाई का शिलान्यास किया। इसके अलावा, यमुनानगर में 90 करोड़ रुपये की लागत से गोबर-धन संयंत्र का शिलान्यास किया। वहीं, करीब 1069 करोड़ रुपये से बने रेवाड़ी बाइपास का भी उद्घाटन किया।
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यमुनानगर की नई यूनिट के निर्माण में 233 एकड़ भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा। इस परियोजना की समयसीमा 52 महीने रखी गई है, जबकि वाणिज्यिक संचालन 48 महीनों के अंदर यानी मार्च, 2029 तक शुरू हो जाएगा। इससे राज्य की घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता 3,382 मेगावॉट तक बढ़ जाएगी। वहीं, 1069 करोड़ से तैयार चार लेन का रेवाड़ी बाईपास रेवाड़ी शहर के चारों ओर बनाया गया है। यह बाईपास 14.4 किलोमीटर लंबा है, जो एनएच.-352 जंक्शन को नारनौल की दिशा में एन.एच.-11 से जुड़ता है। इससे रेवाड़ी के लोगों को ट्रैफिक की समस्या से मुक्ति मिलेगी, वहीं, नारनौल से दिल्ली जाने के समय में एक घंटे की कटौती होगी। इससे यात्री और माल ढुलाई दोनों की सुविधा बढ़ेगी।
गोबर-धन संयंत्र से हर साल बनेगी 2600 मीट्रिक टन कंप्रेस्ड बायोगैस
नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी की ओर से बीपीसीएल के सहयोग से यमुनानगर के मुकारबपुर में 90 करोड़ रुपये की लागत से गोबर-धन संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस संयंत्र की कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन की वार्षिक क्षमता 2,600 मीट्रिक टन होगी। यह परियोजना मई 2027 तक पूरे होने की उम्मीद है। इस प्लांट में सालाना 45,000 मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से निपटान किया जाएगा। साथ ही 36,000 मीट्रिक टन गाय के गोबर का उपयोग किया जाएगा। सीबीजी बायोगैस का शुद्ध रूप है और सीएनजी का विकल्प है। इसमें सीएनजी की तरह गुणधर्म होते हैं। यह ज्वलनशील पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल खाना पकाने व मोटर वाहन पकाने व इंडस्ट्री में इस्तेमाल किया जा सकता है।