विधायक की बात पर बिजली मंत्री रणजीत चौटाला ने सदन में कहा कि यदि ऐसा है तो मैं इस मामले की जांच करवाऊंगा। बिजली मंत्री के जवाब के बावजूद वरण मुलाना अड़ रहे और उन्होंने कहा कि इस काम को राइट टू सर्विस एक्ट के तहत लाया जाए यदि कोई पैसा देता है तो उसका खंभा हटता है अन्यथा नहीं।
बात आगे बढ़ी तो दुष्यंत चौटाला ने मोर्चा संभाला और कहा कि इस मामले में दूसरें राज्यों का अध्ययन करवा लेते हैं और एक कमेटी बना देते हैं। उनकी इस बात पर विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि यह तो जनहित का काम है करना चाहिए। हम जनप्रतिनिध यहां इसीलिए बैठे हैं। स्पीकर की इस बात पर अन्य विधायक भी सहमत दिखे और उन्होंने मेज थपथपा कर स्पीकर की बात का समर्थन किया।
स्पीकर ने मिलाया वरुण के सुर में सुर
मुलाना से कांग्रेस विधायक वरुण चौधरी ने बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान सदन में यह मुद्दा उठाया। उनकी मांग पर पक्ष-विपक्ष के कई विधायकों के साथ खुद स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने भी सुर से सुर मिलाया। स्पीकर ने इस मुद्दे पर यहां तक कह दिया कि वे तो खुद भुक्त भोगी हैं। उन्हें पता है कि एक खंभा कैसे हटवाया गया था।
स्पीकर बोले जिनकी जमीन पर खंभा उन्हें कुछ देते हो क्या
स्पीकर ने कहा कि जब लोगों की जमीन का इस्तेमाल खंभों के लिए किया जाता है तो उन्हें किराया भी मिलना चाहिए। जब किराया नहीं देते तो पूरी सरंचना का बोझ उन पर क्यों डाला जाता है। अगर पुराने खंभे और तार इस्तेमाल में लाई जा सकती हैं तो उनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता। इस दौरान बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने कहा कि निजी रिहायशी भूमि पर बिजली के लगाए गये खंभों को हटाने या दूसरी जगह लगाने की समीक्षा की जाएगी।