गौतम ने पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु और दुष्यंत चौटाला के बीच सेंटिंग के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह जजपा में इसलिए शामिल हुए थे कि शायद दुष्यंत चौधरी देवीलाल के रास्ते पर चलेगा। मगर उन्हें नहीं पता था कि इस तरह सेटिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुझे मंत्री नहीं बनाया, इस बात का दुख नहीं है। दुख तो इस बात का है कि गुरुग्राम के एक मॉल में मिलकर दुष्यंत और कैप्टन आपस में समझौता कर गए। अगर समझौता करना था तो पहले कर लेते, नारनौंद हलके की जनता को क्यों मारा। अगर मंत्री बनता तो बहुत काम करवाता, इस बात के लिए मेरा और नारनौंद की जनता का भाग्य माड़ा था।
दिग्विजय के हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ने से किया था मना
रामकुमार गौतम ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान सोनीपत से भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ दिग्विजय चौटाला के मैदान में आने पर भी उन्होंने ऐतराज जताया था। उन्होंने कहा था कि हुड्डा के खिलाफ दिग्विजय को क्यों खड़ा कर रहे हो, तो कहा गया कि अगर दिग्विजय नहीं खड़ा हुआ तो हुड्डा जीत जाएगा। मैंने कहा कि हम तो नहीं जीत रहे और अगर हुड्डा जीत जाता तो हमें क्या तकलीफ है।