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मिस कॉल ने मिलवाया 3 साल से बिछड़ा 'लाल'

Sat, 14 Mar 2015 07:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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तीन साल पहले झज्जर जिले के गांव छोछी से लापता हुए लाल को एक मिस कॉल ने परिवार से मिलवा दिया। किशोर को रोहतक पुलिस ने यूपी के बिजनौर से बरामद किया है। हुआ यूं कि लापता किशोर आकाश के पिता नरेंद्र के पास दो दिन पहले यूपी के किसी नंबर से मिस कॉल आई।
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पुलिस ने नंबर की लोकेशन ट्रेस कराई तो पता लगा कि नंबर बिजनौर जिले का है। टीम बिजनौर में नंबर की लोकेशन के आधार पर तलाश करते हुए मौके पर पहुंची तो वहां से किशोर बरामद हो गया। आकाश (16 वर्ष) ने बताया कि पिता से बात करने का मन किया तो उनके नंबर पर मिस कॉल की थी।

किशोर ने यह भी खुलासा किया है कि वह पढ़ाई के डर से अपने आप भागा था, उसका किसी ने अपहरण नहीं किया। झज्जर पुलिस ढाई साल तक सुराग नहीं लगा पाई तो हाईकोर्ट के आदेशों के बाद आईजी ने जांच रोहतक पुलिस को सौंपी थी।
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3 साल पहले लापता हुआ था युवक

छोछी गांव निवासी नरेंद्र का पुत्र आकाश 2 जुलाई 2012 को गांव के ही दो युवकों सुमित व सचिन के साथ दिल्ली घूमने गया था। शाम को वापसी के वक्त बहराना अड्डे पर उतरने के बाद वे तीनों पैदल ही छोछी की ओर चल पड़े। आकाश आगे-आगे चल रहा था और दोनों दोस्त पीछे।

इसी दौरान आकाश संदिग्ध हालत में लापता हो गया। परिजनों ने 15 दिन बाद बेरी थाने में सचिन व सुमित के खिलाफ आकाश के अपहरण का केस दर्ज करवाया। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन आकाश का सुराग नहीं लग पाया। ढाई साल तक झज्जर पुलिस जांच की करती रही।

हाईकोर्ट में डाली याचिका, एसपी रोहतक ने शुरू की जांच   
ढाई साल तक आकाश का सुराग नहीं लगने पर आकाश की मां ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने एसपी रोहतक को जांच के आदेश दिए। एसपी ने डीएसपी अमित भाटिया के  नेतृत्व में सीआईए-2 इंस्पेक्टर जगबीर सिंह को मामले की जांच सौंपी। 
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मुस्लिम परिवार ने बेटे की तरह पाला

सीआईए-2 इंस्पेक्टर जगबीर सिंह आकाश को लेकर बृहस्पतिवार को रोहतक पहुंचे। मेडिकल के बाद उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया गया। पूछताछ में किशोर ने बताया कि वह उस वक्त 8वीं कक्षा में पढ़ता था और उसे पढ़ाई से डर लगता था। वह अपने दोस्तों को गच्चा देकर वहां से ट्रैक्टर में बैठकर सांपला पहुंचा और सांपला से बहादुरगढ़।

दो दिनों तक बहादुरगढ़ में घूमने के बाद वह किसी गाड़ी में कंडक्टर बनकर उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर में पहुंच गया। वहां महमूद नाम का व्यक्ति मिला तो आकाश ने खुद को अनाथ बताया और उसके साथ बिजनौर चला गया। वहां पर वह महमूद के घर पर ही रहने लगा।

5 बच्चों के पिता महमूद ने बताया कि आकाश उसके लिए छठे बच्चे की तरह था। कभी-कभार उसके साथ गाड़ी पर चला जाता था और कभी घर पर ही रहता था। एसपी शशांक आनंद ने युवक को बरामद करने वाली पुलिस टीम की पीठ थपथपाई है।
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