प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना के खिलाफ अलग अलग मोर्चों पर लड़ाई लड़ने वाले योद्धाओं का उत्साह बढ़ाने की बातें कर रहे हैं, जबकि चंडीगढ़ में ठीक इसके उलट हो रहा है। यहां की रेडक्रॉस सोसायटी उन कोरोना योद्धाओं से अछूतों की तरह व्यवहार कर रही है, जिन्होंने संकटमोचक बनकर संक्रमितों के शवों को न केवल उठाया बल्कि श्मशानघाट तक पहुंचाया।
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रेडक्रॉस की रसोई में ताला लगा दिया गया ताकि वह पानी न पी सकें। कार्यालय में पिछले दरवाजे से आने जाने के लिए कहा गया। बैठने तक की व्यवस्था नहीं की गई। जब उन्होंने अपने साथ हुए इस सुलूक के खिलाफ आवाज उठाई तो उनकी सेवाएं ही रोक दी गईं।
अफसरों के रवैये से आहत कोरोना योद्धाओं ने अब इसकी शिकायत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, एडवाइजर मनोज परिदा, डीसी मनदीप सिंह बराड़ से की है। टीम लीडर रोहित कुमार ने शिकायती पत्र में कहा है कि वह आठ साल से रेडक्रॉस सोसायटी से जुड़े हैं। जब जरूरत हुई निस्वार्थ भाव से समाज सेवा का कार्य किया।
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कोरोना काल में जब रेडक्रॉस सोसायटी के कर्मचारियों ने जब कोरोना संक्रमित शव उठाने से मना कर दिया था, तब हमारे 11 साथियों ने मिलकर इस कार्य को अंजाम दिया। अब रेडक्रॉस में ही हमारे साथ भेदभाव किया जा रहा है। हम अपने हाथ से पानी न ले सकें, इसलिए रसोई में ताला लगा दिया गया है।
पेट्रोल खर्च व नाश्ते की फाइल की कैंसिल कर दी
रोहित ने बताया कि मार्च की शुरुआत से ही हमारी टीम शव उठा रही थी। जुलाई माह में आने-जाने के लिए पेट्रोल खर्च व शव उठाने से पहले कुछ नाश्ता देने की बात कही तो हमें शव उठाने से मना कर दिया गया। कहा कि इस बजट के लिए जो फाइल चली थी, वह कैंसिल कर दी गई है। हमने अपनी स्थिति भी अधिकारियों को बताई कि हमारे पास फिलहाल रुपये नहीं हैं, लेकिन किसी ने एक न सुनी।
नोडल ऑफिसर ने कहा, हम सब कोरोना संक्रमित हैं
कोरोना योद्धाओं ने पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि रेडक्रॉस के नोडल ऑफिसर मोहनलाल ने उन्हें शव उठाने से मना कर दिया। जब लोगों ने हमारे बारे में पूछा तो उन्होंने झूठ कहा कि हम कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। सदस्यों का कहना है कि सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं और कहीं भी उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है। नोडल ऑफिसर बस लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। ताकि सच्चाई पर पर्दा डाला जा सके।
हमारे सामने संक्रमित शव परिजनों से पैक करवाए
सदस्यों ने आरोप लगाया है कि जीएमसीएच-32 में हमारे सामने कोरोना संक्रमित शवों को उनके परिजनों से पैक करवाया गया। लोग संक्रमित होने की दुहाई देते थे, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी। अब तक सभी शव परिजनों से ही पैक कराए गए हैं। जब हम लोगों ने इसका विरोध किया तो हमें नोडल ऑफिसर मोहनलाल ने यह कहकर चुप करा दिया कि इस व्यवस्था से लोगों को यकीन रहेगा कि उन्हें उनके मरीज का ही शव मिल रहा है।
युवती से हुई अभद्रता, सेक्रेटरी ने शिकायती पत्र लौटाया
सदस्यों का आरोप है कि उनकी एक साथी युवती से रेडक्रॉस के एंबुलेंस चालक ने अभद्रता की और पानी देने से इनकार कर दिया। जब सभी सदस्यों ने शिकायत रेडक्रॉस के सेक्रेटरी व एडीसी सचिन राणा से की तो उन्होंने यह कहकर शिकायत पत्र लेने से इनकार कर दिया कि मौके पर ही आकर सभी से मिलूंगा और मामला सुलझाऊंगा। लेकिन आज तक एडीसी हम लोगों से मिलने नहीं आए हैं।
संकटमोचक बने थे ये कोरोना योद्धा
मार्च में जब कोरोना महामारी शुरू हुई तब लोगों को नहीं पता था कि यह इतना भयावह रूप ले लेगी। जब मौतें होनी शुरू हुईं तो रेडक्रॉस के कर्मचारियों ने शव उठाने से मना कर दिया और नौकरी छोड़ने के लिए कह दिया। तब यह 11 योद्धा सामने आए, जिन्होंने संक्रमित शवों को उठाया। अब तक इन योद्धाओं ने 80 से ज्यादा शवों को उठाकर श्मशानघाट तक पहुंचाया है।
15 अगस्त पर सम्मान समारोह में भी अनदेखी
सदस्यों का कहना है कि इस बार 15 अगस्त पर सभी कोरोना योद्धाओं को सम्मानित किया गया, लेकिन जब से यह महामारी शुरू हुई तब से लगातार हम लोगों ने विषम परिस्थितियों में काम किया, लेकिन रेडक्रॉस के अधिकारियों ने हमारी अनदेखी ही की है। सम्मान तो छोड़िए, मंच से एक शब्द भी हमारे लिए नहीं कहा गया।
इस संबंध में कुछ नहीं कह सकता। मैं केवल कोरोना का नोडल ऑफिसर हूं। किस आधार पर यह आरोप लगाए गए हैं, मेरी जानकारी में नहीं है। - मोहनलाल, नोडल ऑफिसर, कोरोना, रेडक्रॉस
एडीसी सचिन राणा ने क्या कहा
अभी मेरी जानकारी में यह मामला नहीं है। हां पहले एक बार शिकायत आई थी, लेकिन मामला सुलझ नहीं पाया था। इस संबंध में जांच कर कमियों को दूर करेंगे। हालांकि अभी खर्चों को लेकर कोई समस्या नहीं आई है। नाश्ते से लेकर अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं। - सचिन राणा, सेक्रेटरी रेडक्रॉस व एडीसी