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Military Literature Festival: मंत्री गगन अनमोल मान बोलीं- पंजाब के युवाओं में घट रहा सेना में जाने का क्रेज

Sat, 03 Dec 2022 09:35 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल ने कहा कि साहित्य और युद्ध का बड़ा लंबा इतिहास रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी कविता महाभारत भी एक युद्ध की गाथा है। आज के समय में तकनीक सिपाहियों के बारे में बच्चों के मन में गलत भावना पैदा कर रही है।
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Military Literature Festival 2022: - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब के युवाओं में भारतीय सेना में जाने का क्रेज जो पहले था अब वह दिखाई नहीं देता है। पंजाब वीरों की धरती है, मुगलों और अफगानों ने पूरे देश को लूटा लेकिन पंजाबियों ने उन्हें इस धरती को लूटने नहीं दिया। यह बात पंजाब की पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों की मंत्री गगन अनमोल मान ने कही। उन्होंने पंजाबियों से फिर से परंपरा निभाते सेना का रुख करने का आग्रह किया।

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मान ने मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान कहा कि खुद को अपने परिवार से दूर कर देश को समर्पित करना आसान नहीं होता है। इस प्रकार के आयोजन से युवाओं को इस देश के वीरों के बारे में जानकारी मिलेगी। मुगलों व अफगानों ने देशभर में हमला करके लूटपाट की लेकिन जब उन्होंने पंजाब की धरती की तरफ नजर उठाई तो पंजाब के वीरों ने उन्हें खदेड़ दिया। 

पूरा देश लूटने वाले पंजाब को नहीं लूट सके। पंजाब के लोगों ने देश के लिए शहादत दी है। हमेशा सरहद पर आगे बढ़कर लड़ाई की है। फौज नौकरी नहीं सेवा है और पंजाब के नौजवानों को आगे बढ़कर सेना में भर्ती होना चाहिए। फेस्टिवल एसोसिएशन के चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल ने कहा कि साहित्य और युद्ध का बड़ा लंबा इतिहास रहा है। 
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दुनिया की सबसे बड़ी कविता महाभारत भी एक युद्ध की गाथा है। आज के समय में तकनीक सिपाहियों के बारे में बच्चों के मन में गलत भावना पैदा कर रही है। छोटे बच्चे वीडियो गेम पर किलिंग करते हैं और खुद को सिपाही मानकर मारने वालों की संख्या बताते हैं। सिपाही यूं ही किसी को नहीं मारता है, वह सोचता है और सही गलत का फैसला करने के बाद ही गोली चलाता है। सिपाही एक संस्कारी व्यक्ति होता है।

प्रौद्योगिकी दो धारी तलवार, मशीन नहीं ले सकती मानव का स्थान
मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में पैनल डिस्कशन के दौरान अधिकतर पैनलिस्ट ने माना कि प्रौद्योगिकी दो धारी तलवार है और इसका इस्तेमाल करते वक्त सिद्धांतों का ध्यान रखना जरूरी है। हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले ड्रोन को लेकर पैनलिस्ट की राय अलग-अलग रही। हालांकि ज्यादातर पैनलिस्ट ने माना कि ड्रोन मानव से बेहतर निर्णय नहीं ले सकता है और उसे किसे मारना है यह निर्णय लेने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है। 

परिचर्चा के दौरान कहा गया कि 90 के शुरुआती दशक में हमें मौसम की जानकारी व अन्य कार्य के लिए कंप्यूटर प्राप्त करने पर विदेश पर निर्भर थे। आज दौर बदल गया है और हर जेब में मोबाइल है जो एक सुपर कंप्यूटर है। आज युद्ध में ड्रोन की भूमिका बेहद अहम हो गई है क्योंकि सूचना युद्ध में जीत का बड़ा हथियार होता है। भविष्य में होने वाले युद्ध में सैनिकों की संख्या कम और मशीनों की ज्यादा होगी। बदलती तकनीक के साथ ही युद्ध का तरीका भी बदल जाता है। चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन युद्ध और नीति बदल सकती है लेकिन मानव का स्थान मशीन नहीं ले सकती। इसके साथ ही नवीनतम तकनीकों में गायब होने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी शामिल हैं। इनके इस्तेमाल से भविष्य में होने वाले युद्ध की सूरत ही बदल जाएगी।
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