दुनिया की सबसे बड़ी कविता महाभारत भी एक युद्ध की गाथा है। आज के समय में तकनीक सिपाहियों के बारे में बच्चों के मन में गलत भावना पैदा कर रही है। छोटे बच्चे वीडियो गेम पर किलिंग करते हैं और खुद को सिपाही मानकर मारने वालों की संख्या बताते हैं। सिपाही यूं ही किसी को नहीं मारता है, वह सोचता है और सही गलत का फैसला करने के बाद ही गोली चलाता है। सिपाही एक संस्कारी व्यक्ति होता है।
प्रौद्योगिकी दो धारी तलवार, मशीन नहीं ले सकती मानव का स्थान
मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में पैनल डिस्कशन के दौरान अधिकतर पैनलिस्ट ने माना कि प्रौद्योगिकी दो धारी तलवार है और इसका इस्तेमाल करते वक्त सिद्धांतों का ध्यान रखना जरूरी है। हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले ड्रोन को लेकर पैनलिस्ट की राय अलग-अलग रही। हालांकि ज्यादातर पैनलिस्ट ने माना कि ड्रोन मानव से बेहतर निर्णय नहीं ले सकता है और उसे किसे मारना है यह निर्णय लेने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है।
परिचर्चा के दौरान कहा गया कि 90 के शुरुआती दशक में हमें मौसम की जानकारी व अन्य कार्य के लिए कंप्यूटर प्राप्त करने पर विदेश पर निर्भर थे। आज दौर बदल गया है और हर जेब में मोबाइल है जो एक सुपर कंप्यूटर है। आज युद्ध में ड्रोन की भूमिका बेहद अहम हो गई है क्योंकि सूचना युद्ध में जीत का बड़ा हथियार होता है। भविष्य में होने वाले युद्ध में सैनिकों की संख्या कम और मशीनों की ज्यादा होगी। बदलती तकनीक के साथ ही युद्ध का तरीका भी बदल जाता है। चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन युद्ध और नीति बदल सकती है लेकिन मानव का स्थान मशीन नहीं ले सकती। इसके साथ ही नवीनतम तकनीकों में गायब होने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी शामिल हैं। इनके इस्तेमाल से भविष्य में होने वाले युद्ध की सूरत ही बदल जाएगी।