एथलेटिक्स में मिल्खा सिंह और पीटी ऊषा का नाम कौन नहीं जानता। वर्षों बाद अब एक युवा धावक हिमा दास भी इनके नक्शे कदम पर चल रही हैं, जिन्होंने आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है। इसी जीत के साथ ही हिमा विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गईं हैं। फिनलैंड में आयोजित चैंपियनशिप में हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता, उनके पीछे रोमानिया की एंड्रिया मिक्लोस 52.07 सेकेंड के साथ दूसरे और अमेरिका की टेलर मैनसन 52.28 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
मिल्खा सिंह ने हिमा दास को सैल्यूट करते हुए कहा कि उन्होंने यह कारनामा करके दिखा दिया कि भारतीय महिलाएं किसी से कम नही हैं। वर्षों बाद मैंने ऐसी एथलीट को देखा है, जिसने टॉप की विदेशी महिला खिलाड़ियों को ट्रैक पर कमाल किया है। अमर उजाला से बातचीत के दौरान मिल्खा सिंह ने बताया कि यह मुकाबला मैंने लाइव देखा। जीत के साथ ही मेरे मुंह से निकला, जिउंदा रह मेरे पुत्तर पुत्तर, तूं देश दा नां रौशन कीता। इसके बाद मैंने हिमा दास के कोच और उनके परिवार वालों को बधाई दी।
ओलंपिक में मेडल जीत सकती हैं
मिल्खा सिंह ने कहा कि हिमा में काफी टैलेंट दिखाई दे रहा है। आगामी 2020 में जापान में होने वाली ओलंपिक में हिमा मेडल जीतकर इतिहास रच सकती है। 400 मीटर रेस के लिए स्टेमिना, स्पीड, स्ट्रैंथ होना एक एथलीट की कामयाबी के लिए सबसे जरूरी है।
हिमा दास ने इतिहास रचा है। किसी भारतीय महिला ने आईएएएफ चैंपियनशिप में गोल्ड जीता है। यह बहुत बड़ी कामयाबी है। इस इवेंट में हिमा दास में विदेशी खिलाड़ियों को दिखा दिया कि भारत के एथलीट किसी से कम नही हैं।
सिमरन कौर, 100 और 200 मीटर की नेशनल मेडलिस्ट
एक महिला होने के नाते मुझे हिमा दास पर नाज है। हमें भी उनसे प्रेरणा लेकर आगे तक जाना होगा। अगर वह यह कर सकती है तो हम भी ऐसा मुकाम हासिल कर सकते हैं। इसके लिए दिन रात मेहनत करनी होगी।
लवलीन कौर, 100 और 200 मीटर, ट्रिपल जंप की नेशनल मेडलिस्ट
हिमा ने यह कारनामा मात्र 18 वर्ष की उम्र में कर दिखाया। ऐसा लगता है कि वह ओलंपिक गेम्स तक पहुंच कर देश के लिए मेडल जीतने में जरूर कामयाब होगी। एक एथलीट के नाते आज मेरे के लिए काफी बड़ा दिन है।
खुशी राणा, शॉटपुट मेडलिस्ट
इससे पहले भारत में पीटी ऊषा को ही महिला एथलीट ने नाते जाना जाता था। वर्षों के अंतराल के बाद फिर से एक महिला एथलीट में का नाम आज हर किसी की जुबान पर आया है।
दमनजोत, सिटी के बेस्ट एथलीट अवार्ड जीत चुके है।