शीशे पर हथौड़ा चलाते आर्टिस्ट मिखाएल
- फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के दौरान आया आइडिया
मूल रूप से केरल के कोट्टयम के रहने वाले मिखाएल की परवरिश और पढ़ाई मुंबई में हुई। लॉकडाउन के दौरान उन्हें इंटरनेट पर इस कला के बारे में पता चला, तो दंग रह गए। स्विट्जरलैंड के शैटर्ड ग्लास आर्टिस्ट साइमन बर्जर को अपनी प्रेरणा बनाते हुए उन्होंने इसमें हाथ आजमाया। शुरुआत काफी निराशापूर्ण रही। अनगिनत शीशे बर्बाद हुए। अपनी सेविंग से ही इसका सारा खर्च उठाया। परिवार और दोस्तों को भी यह थोड़ा अजीब लगता था, लेकिन मिखाएल तीन साल के अभयास से इसे खुद से ही सीखा। वह कहते हैं कि इस संघर्ष में उन्हें अपने दोस्तों रमेश, विवेक भारती शर्मा और डायना का भरपूर योगदान मिला, जिसकी बदौलत वह पूर्ण कलाकार बन पाए।
शीशे पर उकेरे गए चित्र।
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बाहशाह के गाने मोरनी के लॉन्च पर दी परफॉर्मेंस
मिखाएल ने हाल ही में रैपर बाहशाह के गाने मोरनी के लॉन्च पर भी अपनी कला की लाइव परफॉर्मेंस दी। मिखाएल कहते हैं कि इस कला में सटीक होना बहुत जरूरी है। लेमिनेटिड ग्लास पर घंटों की मेहनत के बाद एक पोट्रेट तैयार होता है। वह अपने बनाए पोट्रेट कई शहरों में प्रदर्शित कर चुके हैं। इंटरनेट पर भी यह आर्ट बहुत पॉपुलर हो रहा है। लोग इसे देखकर चौंक जाते हैं।
चंडीग़ढ़ में प्रदर्शनी लगाने की इच्छा
मिखाएल कहते हैं कि चंडीगढ़ कलाप्रेमियों का बड़ा केंद्र है। वह चाहते हैं कि यहां अपने पोट्रेट की प्रदर्शनी लगाएं। नेक चंद के बारे में वह कहते हैं कि उनकी कला कई वर्षों तक लोगों से छिपी रही, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा और आज उनकी कला की दुनिया दीवानी है। ऐसे महान कलाप्रेमी के शहर में लाइव परफॉर्मेंस देना सपने के सच होने जैसा है। वह अपनी कला के जरिये रॉक गार्डन के संस्थापक नेकचंद को उनकी सौवीं जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि देना चाहते हैं।