मैं डेराबस्सी में हलवाई का काम करता हूं। महीने का 10 से 15 हजार मिल जाता था उसी में अपना गुजारा करके बाकी पैसे घर भेज देता था। परंतु पिछले 2 महीनों से कोई काम नहीं मिल रहा है, इसलिए अब वापस जाने का मन बनाया है। -बृजेश कुमार, हलवाई।
लोगों को मुसीबत की इस घड़ी में एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए, ताकि इस महामारी को खत्म किया जा सके। परंतु लोगों ने इस दौरान भी अपने फायदे ढूंढने शुरू कर दिए हैं। हर चीज को महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। -विनोद कुमार
दिहाड़ी पर काम करते हैं और पिछले 3 महीनों से कोई काम नहीं किया। सोचकर आए थे कि काम करेंगे लेकिन लॉकडाउन के बाद खाने-पीने को लेकर ही संघर्ष करना पड़ रहा है। अब वापस जा रहे हैं और लौटकर दोबारा नहीं आएंगे। -गुड्डू और गुरदेव, दिहाड़ीदार
फरवरी में काम की तलाश में यहां आया था लेकिन लॉकडाउन के बाद काम तो दूर यहां तो खाने-पीने को लेकर परेशान होना पड़ रहा है। घर से पैसे मंगवाकर मकान मालिक को दिए, जिसके बाद ही मालिक ने सामान उठाने दिया। -लकड़ू राय, हलवाई।