याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि अनेक मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा में देरी के आधार को स्वीकार करते हुए कई मामलों में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला गया है। इस केस में भी सुप्रीम कोर्ट उनकी एक महिला साथी की फांसी को उम्रकैद में बदल चुका है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा को बरकरार रखने के आदेश के बाद सात साल बीत चुके हैं।
ऐसे में हाईकोर्ट उन पर रहम करते हुए देरी के आधार पर उनकी सजा को उम्रकैद में बदल दे। हाईकोर्ट से सभी पक्षों को सुनने के बाद दो दोषियों की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने दोनों की फांसी पर मोहर लगाते हुए दोनों की याचिकाओं को खारिज कर दिया।
यह था मामला
14 फरवरी 2005 की सुबह नौवीं कक्षा के हैरी उर्फ अभि वर्मा को कच्चा टोबा के पास से उसके पिता के मित्र विक्रम वालिया उर्फ विक्की ने गाड़ी में स्कूल छोड़ने के बहाने किडनैप कर लिया था। विक्की की पत्नी सोनिया बच्चे की टीचर थी। तीन घंटे बाद अपहरणकर्ताओं ने अभी के परिजनों से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी।
इस बीच शहर के बाहरी इलाके में एक घर में हैरी को नशे के इंजेक्शन देकर बेहोश रखा गया और इंजेक्शन दकर ही उसकी हत्या कर दी गई। इस दौरान विक्की हैरी के परिजनों के साथ तलाश का नाटक करता रहा था। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर गोकुल नगर इलाके के एक घर से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और उनकी निशानदेही पर अगली सुबह हैरी का शव अलावलपुर के पास खेतों में पड़ा मिला था।