कृष्ण लाल मरवाह और डाल चंद।
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रेलवे से सेवानिवृत लोको पायलट डाल चंद का कहना है कि आठ सितंबर 1965 को भारत-पाक जंग के दौरान लोको शेड में शाम के वक्त इंजन मरम्मत व अन्य कार्य चल रहा था। देखते ही देखते पाकिस्तान जहाजों ने बमबारी शुरू कर दी थी। कुछ बम लोको शेड पर गिरे इसमें रेलवेकर्मी करतारा सिंह, मुलतानी राम (फ्यूल इश्यूअर), बनारसी दास (शेड क्लीनर) व हरि कृष्ण (इलेक्ट्रिशियन) की जान चली गई।
डाल चंद ने कहा कि हम भी जवानों से कम नहीं हैं। जंग में जान गंवाने वालों की याद में डीआरएम या रेलवे स्टेशन परिसर में स्मारक का निर्माण कराया जाए, ताकि रेलवे में नौकरी करने आ रहे नए नौजवानों को भी इनके बारे में पता चल सके।
रेलवे लोको पायलट रहे कृष्ण लाल मरवाह (93) ने कहा कि उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं है। बस इतना ही पता है कि लोको शेड में बम गिरे थे और कुछ रेलवे कर्मियों ने जान गंवाई थी। उन्होंने बताया कि 1965 युद्ध के समय ट्रेन चलाकर फिरोजपुर के लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने में जुटा था। रेल अधिकारी हमारे जैसे लोगों को भी पूछते नहीं है।