यूटी प्रशासन के अधिकारी सुखना लेक के कैचमेंट एरिया को लेकर सोमवार को सुनाए गए हाईकोर्ट के आदेशों की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं। एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि आदेशों को पढ़ने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए बैठक करेंगे। इस बारे में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और पंजाब-हरियाणा के मुख्यमंत्रियों से भी चर्चा की जाएगी।
एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि अभी उन्होंने अखबारों के माध्यम से ही आदेश के कुछ बिंदुओं को पढ़ा है। जो कमेटी बनाने की बात कही गई है, वह केवल चंडीगढ़ के स्तर की अलग कमेटी होगी या फिर पंजाब-हरियाणा के साथ मिलकर बनाई जानी है। इस मामले में पूरे आदेश को पढ़ने के बाद ही आगे बढ़ा जा सकता है।
उधर, प्रशासन के कई अधिकारी ये भी कह रहे हैं कि मामला सुप्रीम कोर्ट में जाना तय है। वहीं, कुछ का कहना है कि मामला एडवाइजरी काउंसिल में भी उठ सकता है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तीनों जगहों के लोगों ने सुखना कैचमेंट एरिया में निर्माण किया हुआ है।
9 से 10 हजार या इससे भी ज्यादा निर्माण इस एरिया में हो सकते हैं। ऐसे में जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाना सही नहीं होगा। जहां तक कमेटी के निर्माण की बात है तो वह हाईकोर्ट के निर्णय अनुसार तय कर दी जाएगी जो आसपास हुए अवैध निर्माणों की जानकारी हासिल करेगी।
लाल डोरे के अंदर हुए निर्माण कैचमेंट में होने के बावजूद भी नहीं गिराए जाएंगे
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद कई गंभीर स्थितियां पैदा हो गई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि शहर में कई मकान ऐसे हैं जो लाल डोरे के अंदर बने हैं लेकिन सुखना कैचमेंट एरिया के अंदर आते हैं। अब जब कैचमेंट में आने वाले निर्माण को गिराने के आदेश दिए गए हैं तो उन निर्माणों का क्या होगा, इसको लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
हालांकि चंडीगढ़ प्रशासन की दलील है कि लाल डोरे में जो मकान हैं और अगर वह सुखना कैचमेंट एरिया में भी पड़ रहे हैं तो इन मकानों को गिराया नहीं जा सकता। तर्क है कि लाल डोरे की सीमा भी तो कानून के तहत ही तय हुई है। लाल डोरे में मकान बनाने की परमिशन होती है, लिहाजा तभी तो लाल डोरा तय होता है।