पंजाब के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस पास करने वाले छात्रों को एमडी कोर्स में दाखिले के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में राज्य सेवा केपीसीएमएस डॉक्टरों के लिए आरक्षित स्टेट कोटे की 60 फीसदी सीटों का प्रावधान रद्द कर दिया है। मामले में पहले ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से बार-बार कहा जा चुका है कि राज्य अपने मेडिकल कॉलेजों में संबंधित राज्य का निवासी होने को आधार बनाकर सीटें आरक्षित नहीं कर सकते।
दाखिले शैक्षणिक प्राथमिकता के आधार पर दिए जाने चाहिए। अब हाईकोर्ट के आदेश से पंजाब के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस पास उन डॉक्टरों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स के लिए दाखिले का रास्ता खुल गया है, जो पंजाब से बाहर रहते थे। हालांकि उन्होंने एमबीबीएस पंजाब के कॉलेज से पास की थी। डॉक्टर बल जसकरण सिंह समेत 18 एमबीबीएस चिकित्सकों ने एडवोकेट रमनप्रीत सिंह बारा के माध्यम से उपरोक्त तथ्य उजागर करते हुए याचिका दायर की थी।
आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर इस वर्ष स्टेट कोटे की 60 फीसदी सीटें पंजाब के निवासी सरकारी पीसीएमएस डॉक्टरों के लिए आरक्षित कर दी। याचिका की पैरवी करते हुए एडवोकेट गुरमिंदर सिंह गैरी ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य के कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स के लिए पंजाब से बारहवीं पास होना अनिवार्य है, लेकिन पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में दाखिले के लिए फिर प्रक्रिया बदलकर पंजाब का निवासी होने की शर्त निर्धारित कर दी गई। इसके लिए पिछले साल 30 दिसंबर को नोटिफिकेशन जारी की गई। इस नोटिफिकेशन को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग की गई थी।
याचिका में कहा गया था कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स के लिए राज्य के निवासियों के लिए 50 प्रतिशत का प्रावधान है, लेकिन पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में यह प्रावधान लागू नहीं होता। हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पिछले साल भी दाखिलों के लिए सरकार ने ऐसा ही प्रावधान बनाया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट की एकल बेंच ने सरकार की नोटिफिकेशन रद्द कर दी थी और कुछ डॉक्टरों ने अपील के माध्यम से इस आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश पर रोक नहीं लगी है। एकल बेंच ने आरक्षण का आंकड़ा जुटाने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने का आदेश भी दिया था। कमेटी ने पंजाब के निवासी सरकारी पीसीएमएस डॉक्टरों के लिए 60 फीसदी सीटें आरक्षित कर दीं। इसी आधार पर सरकार ने नोटिफिकेश जारी कर आरक्षण दे दिया, जो गलत है।