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नगर निगम की बैठक में वेंडरों को दी गई राहत, कौन-से एजेंडे हुए पास और खारिज, यहां जानिए

Thu, 31 Jan 2019 12:40 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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नगर निगम चंडीगढ़ की बैठक
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चंडीगढ़ निगम सदन की बैठक में वेंडर्स एक्ट के तहत दुकानों के बाहर सामान रखने वाले और दुकानों के आगे वेंडर्स को किराए पर जगह देने वाले दुकानदारों पर जुर्माना लाने के प्रस्ताव पर लंबी बहस हुई। पार्षदों की मांग थी कि दुकानदारों को वेंडर्स एक्ट में न डाला जाए। सदन में भाजपा पार्षद अरुण सूद दुकानदारों का बचाव करते दिखे जबकि नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने उन्हें वेंडर्स एक्ट की धाराएं समझाने की कोशिश कर रहे थे।
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निगम सदन में बुधवार को जो प्रस्ताव लाया गया उसमें एक्ट का उल्लंघन करने वाले वेंडरों पर पहली बार में 500+4000, दूसरी बार 500+4500 तथा तीसरी बार जुर्माने के साथ सामान जब्त करने का प्रावधान किया गया था। पार्षदों की बहस के बाद इस राशि को घटाकर पहली बार 500+1000 (1500), दूसरी बार पकड़े जाने पर 500+1500 (2000) के जुर्माने का प्रावधान किया गया व सामान जब्त करने का प्रावधान खत्म कर दिया गया। जबकि दुकानदारों पर 10,000 रुपये की जुर्माने का प्रावधान नहीं हटाया गया।

कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला का कहना था कि दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे जो वेंडर्स बैठाए हैं, उनसे उन्हें तो किराया मिल रहा है पर निगम को कुछ हीं मिलता। उनका कहना था कि शहर में 50 प्रतिशत से अधिक वेंडर अवैध रूप से बैठे हैं। सूद ने मांग की कि सेक्टर-17 में सर्कस ग्राउंड में वेंडर्स को जगह दी जा सकती है। इस पर नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि वह जगह होटल के लिए है। उनका कहना था कि शहर में अधिकांश खाली पड़ी साइटों की प्लानिंग प्रशासन का आर्किटेक्ट विभाग कर चुका है इसलिए नगर निगम अपनी मर्जी से कोई प्लानिंग नहीं कर सकता।
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उनका कहना था कि अभी तक निगम ने 6500 वेंडर्स रजिस्टर किए हैं जबकि सर्वे में करीब 22000 वेंडर थे। वहीं, पूर्व मेयर देवेश मोदगिल ने मांग की कि शहर में रोज रोज नए नए वेंडर्स को कौन बैठा रहा है, इस नेक्सेस की जांच की जानी चाहिए। उनका कहना था कि निगम को इन पर नजर रखने के लिए कडे़ कदम उठाने ही होंगे।

ये एजेंडे सदन में हुए पास

- सदन की बैठक में शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों से कूड़ा एकत्र करने के लिए 100 वाहन खरीदने, जिसमें मनीमाजरा के लिए भी दो वाहन खरीदने का प्रस्ताव था उसे पास कर दिया गया।
- हल्लोमाजरा में खाली पड़ी कार बाजार साइट को टूरिस्ट बसों को पार्क करने के लिए अलॉट करने का प्रस्ताव
- शहर में हाल ही में विकसित ग्रीन बेल्टों, पार्कों आदि के रखरखाव के लिए माली, कारपेंटर, लोहार आदि की भर्ती करने का प्रस्ताव
- प्रशासन द्वारा शहर में विज्ञापनों के यूनिपोल लगाने के लिए अलाटेड 24 स्थलों की नीलामी की शर्तें तय करने का प्रस्ताव
- सेक्टर 22 की मार्केट के पीछे सीवर लाइन बदलने, विकास नगर में सामुदायिक केन्द्र के निर्माण और सेक्टर 25 (वेस्ट) में मरे जानवरों के निष्पादन प्लांट लगाने का प्रस्ताव
- कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक पानी लाने के लिए 147.56 लाख रुपये का प्रस्ताव पास हुआ।
- मौली जागरां के कम्युनिटी सेंटर के निर्माण के लिए एक करोड़ 47 लाख रुपये की मंजूरी मिली।

ये एजेंडे हुए खारिज

- सदन की बैठक में सेल्फ असेस्टमेंट स्कीम के तहत प्रापर्टी टैक्स में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का एजेंडा को रिजेक्ट कर दिया गया।
- सदन में हाल ही में प्रशासन से निगम को मिले 13 गांवों में संपत्ति कर लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिसे सीनियर डिप्टी मेयर हरदीप सिंह व अन्य पार्षदों के विरोध के कारण पास नहीं किया गया। इसे रिजेक्ट कर दिया गया।
- धोबी घाटों से आय प्राप्ति के लिए नीति निर्धारण प्रस्ताव को डैफर कर दोबारा कमेटी के पास भेज दिया गया। इस पर अगली बैठक में चर्चा होगी।
- मोबाइल टावरों के लिए पॉलिसी बनाने का प्रस्ताव रद्द कर दोबारा चर्चा लाने की बात कही गई।
- शहर में कम्युनिटी सेंटरों और जंज घरों की नई पॉलिसी बनाने का प्रस्ताव भी रद्द कर दिया गया।
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मेयर के वार्ड का एजेंडा पास, कैंथ ने किया विरोध

मेयर राजेश कालिया के वार्ड का एजेंडा पास कर दिया गया लेकिन सतीश कैंथ ने विरोध किया। विरोध करते हुए वह सदन की वेल में आ गए। कैंथ ने कहा कि जो एजेंडा लाया गया। यह विकास का एजेंडा है। इसका विरोध नहीं है लेकिन कहां से फंड लगाया जा रहा है, इसका जिक्र नहीं है। जब नगर निगम कमिश्नर ने चीफ इंजीनियर से पूछा तो उन्होंने कहा कि इसके लिए आनेवाले बजट से इसमें फंड अरेंज करेंगे।

नगर निगम कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगे से जो भी एजेंडा जाएगा उसका फंड का भी जिक्र होना चाहिए। निगम सदन में मलोया की ग्वाला कालोनी, मलोया कालोनी व मलोया गांव में पेवर ब्लाक लगाने के एजेंडे भी रखे गए। सतीश कैंथ ने यह कह कर इनका विरोध किया कि इनके लिए बजट में प्रावधान ही नहीं है तो इन्हें पारित नहीं किया जा सकता।

कई पार्षदों ने की शिकायत
नगर निगम सदन में बैठक के दौरान कई पार्षदों को शिकायत थी कि वह अपनी वार्ड डेवलपमेंट फंड से जो कार्य करवाना चाहते हैं वह भी नहीं हो रहा है। इस पर नगर निगम कमिश्नर ने सदन में स्पष्ट किया किया वार्ड फंड से कराए जा रहे कार्यों को रोकने की निगम की कोई नीति नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वार्ड फंड के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
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