इस दाैरान नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में लाए गए 22 गांवों के रखरखाव का समर्थन करने के लिए एक अलग अनुदान की मांग की गई। उन्होंने कहा कि निगम वर्तमान में लगभग 1860 किलोमीटर सड़कों का रखरखाव कर रहा है। यह शहर के कुल सड़क नेटवर्क का लगभग 60 फीसदी है। महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद निगम को वाहन पंजीकरण और हस्तांतरण के माध्यम से आरएलए के वार्षिक राजस्व का कोई विशेष हिस्सा नहीं मिलता है। मेयर बबला ने नगर निगम के नियमों का हवाला देते हुए आग्रह किया कि राजस्व का कम से कम 50% निगम को आवंटित किया जाए। उन्होंने बताया कि पंजाब नगर निगम कानून (चंडीगढ़ तक विस्तार) अधिनियम 1994 द्वारा चंडीगढ़ विस्तारित किया गया है। नियमों के तहत एकत्र करों का एक हिस्सा सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक पार्किंग सुविधाओं के रखरखाव के लिए निगम को हस्तांतरित होना चाहिए।
22 गांवों के रखरखाव के लिए वित्तीय चुनौतियां
मेयर ने निगम की सीमा में आए 22 गांवों के रखरखाव में वित्तीय चुनौतियों पर बात की। बताया कि पहले पंचायत समितियों से सरकारी अनुदान मिलता था जिससे विकास के काम होते थे। नगर निगम की सीमा में आने के बाद इन क्षेत्रों को वार्षिक रखरखाव अनुदान मिलना बंद हो गया। उन्होंने सड़क रखरखाव, जल निकासी, जल आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम और सार्वजनिक पार्कों जैसी आवश्यक सेवाओं को जारी रखने के लिए इसी तरह के वित्तीय समर्थन की अपील की है।