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चंडीगढ़ भाजपा में गुटबाजी: अपनी पार्टी के नेताओं की नजरों से गिरे मेयर

Thu, 12 May 2016 11:31 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग में मेयर अरुण सूद - फोटो : अमर उजाला
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गुटबाजी की मार से जूझ रही भाजपा का 15 साल बाद नगर निगम में कब्जा होने के बावजूद मुश्किलें बढ़ गई हैं। सेक्टर-17 की मल्टीलेवल पार्किंग को चलाने के लिए बंद की गई साहिब सिंह और इंपायर स्टोर की पार्किंग के फैसले के खिलाफ भाजपा मेयर और अध्यक्ष संजय टंडन अपनी ही पार्टी के नेताओं की नजरों से गिर गए हैं। पार्टी के कई नेता और पार्षद इन पार्किंग को खोलने के लिए व्यापारियों के समर्थन में खड़े हो गए हैं।
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जबकि पार्टी पहले ही गुटबाजी से जूझ रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ने इस मुद्दे पर मेयर के खिलाफ जबरदस्त मोर्चा खोल दिया है। जबकि निगम के तीन से चार मनोनीत पार्षद भी व्यापारियों के हक में पार्किंग बंद करने के फैसले के खिलाफ हैं। वहीं सीनियर डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल, भाजपा पार्षद सौरभ जोशी, हीरा नेगी, अकाली पार्षद हरदीप सिंह, देसराज गुप्ता, सतिंदर सिंह और भाजपा पार्षद सतप्रकाश अग्रवाल भी पार्किंग बंद करने के फैसले के खिलाफ हैं।

फायदा देख कांग्रेस ने साधी चुप्पी
मेयर के खिलाफ धवन और भाजपा के अपने ही पार्षदों को देख कांग्रेस ने चुप्पी साध ली है। क्योंकि उन्हें पता है कि गुटबाजी का फायदा उन्हें ही मिलेगा। कांग्रेस के अनुसार इस साल के अंत में नगर निगम के चुनाव हैं। ऐसे में गुटबाजी में भाजपा को नुकसान झेलना पड़ेगा।
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व्यापारियों के हक में नहीं फैसला : सतप्रकाश
भाजपा पार्षद सतप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि पार्किंग बंद करने का फैसला व्यापारियों के हित में नहीं है। वह इस फैसले के खिलाफ हैं। इस फैसले को बदलना चाहिए।

बंद की गई पार्किंग खुलनी चाहिए: डिप्टी मेयर
सीनियर डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल का कहना है कि मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण के समय अगर व्यापारियों को पार्किंग बंद करने के प्रस्ताव के बारे में नहीं बताया तो गलत किया है। बंद की गई पार्किंग खोली जानी चाहिए। व्यापारियों का कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

सदन में पास हुआ है प्रस्ताव : मेयर
मेयर अरुण सूद का कहना है कि स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव सदन में बहुमत से पास हुआ है। अगर व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होता है तो फैसले को रिव्यू किया जाएगा। पार्किंग बंद करने का फैसला उनका निजी नहीं है। वित्त एवं अनुबंध कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया है।

इसलिए बैठक की गई थी स्थगित
मेयर अरुण सूद भली भांति जानते थे कि पार्किंग बंद करने के फैसले के खिलाफ उनकी पार्टी के कई पार्षद और मनोनीत पार्षद खिलाफ हैं। इसलिए 30 अप्रैल को हुई सदन की बैठक में हंगामे के बीच मेयर ने इस प्रस्ताव पर चर्चा नहीं कराई। बैठक स्थगित कर दी, जबकि कांग्रेस ने सदन में इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए टेंबल एजेंडा भी पेश कर दिया था।
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