‘अल्फ अल्लाह चंबे दी बूटी, मुरशद मन मेरे लाई हो, नफी असबत दा पानी मिलेया, हर रागे हरजाई हू...’। सुल्तान बाहू के लिखे इस कलाम के साथ सूफी सिंगर मास्टर सलीम ने रविवार शाम सेक्टर-10 स्थित लेजर वैली में सातवें आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल के रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत की।
मास्टर सलीम ने सुल्तान बाहू, बुल्ले शाह, गुलाम अली जैसे दिग्गज लोगों के कलाम से लेजर वैली का माहौल सूफियाना बना दिया।
रविवार को सूफी सिंगर मास्टर सलीम ने परफार्मेंस दी। सुल्तान बाहू के कलाम से शुरुआत करने के बाद सलीम ने बुल्ले शाह के ‘बुल्ला कैंदा है कैंदा है’, ‘नैना दे नैना दे हरफ पढ़ावा कीवे, दिल ते लिखियां विखावा कीवे, मेरा पीर जाने मेरी पीड़ ओ जाने ना, नैना दे नैना दे...’ इक वारी हां कर दे सोनिए... जैसे सूफी गीतों से लोगों की वाहवाही लूटी। इस दौरान उनके शेर- ‘राम वालों को मुसलमान से बू आती है, अहले मुसलमान को भगवान से बू आती है, यहां से इंसान को इंसान से बू आती है’।
पर लोगों ने खूब तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। उसके बोल कुछ ऐसे थे, इसके बाद सलीम ने ढोल जगीरों दा, नुसरत फतेह अली खान का आजा वे माही तेनु रस्ता उड़िक दिया, गुरदास मान का छल्ला, बॉलीवुड सॉन्ग रो रहा हूं मैं न आदि गीतों से समा बांधा।
उम्मीद से कम पहुंची भीड़
अब इसे सर्दी का असर कहें या प्रशासन की कार्यक्रम को लेकर कम पब्लिसिटी, जो भी हो सूफी सिंगर मास्टर सलीम को सुनने उतने लोग नहीं पहुंच सके जितनी की उम्मीद लगाई जा रही थी। हालांकि एडवाइजर विजय कुमार देव, डायरेक्टर कल्चरल अफेयर्स जितेंद्र यादव भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। लेकिन कार्यक्रम में लोगों की मौजूदगी बहुत कम रही। करीब 80 फीसदी सीटें खाली थीं।
व्यवस्था में लापरवाही नजर आई
लेजर वैली में आयोजित सूफी सिंगर की परफार्मेंस के दौरान व्यवस्था के नाम पर काफी लापरवाही दिखी। एडवाइजर और डायरेक्टर कल्चरल अफेयर्स की मौजूदगी में मास्टर सलीम ने स्टेज से कार्यक्रम के संचालकों को इस बारे में अगली बार ठीक व्यवस्था करने को कहा। साथ ही साउंड सिस्टम को लेकर भी बार-बार कमेंट किए। परफार्मेंस के दौरान माइक खराब होने के कारण बीच-बीच में बोल टूट रहे थे। इसे लेकर उन्होंने साउंड सिस्टम कंट्रोल कर रहे लोगों को सुनाया भी।