उसके पास से भी ग्रेनेड ही मिले थे। जांच एजेंसियां मान कर चल रही हैं कि दोनों सूबों के कट्टरपंथियों के बीच कड़ियां जुड़ गई हैं। पंजाब में अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर जैसे जिले आतंकवाद का गढ़ रहे थे। आज भी पुलिस जिन आतंकवादियों को गिरफ्तार करती है, उनकी जड़ें इन्हीं इलाकों में मिलती हैं। वहीं, जैशे-मोहम्मद के आतंकी संगठन अंसार-गजवा-तुल-हिंद के प्रमुख जाकिर मूसा के पंजाब में होने की खबरें भी इस थ्योरी को बल दे रही हैं।
मकसूदां थाने पर हमले के मामले में पुलिस ने इसी संगठन के दो नौजवानों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कश्मीर में सख्ती के बाद पंजाब ही मूसा के लिए सबसे सेफ हैवन हो सकता था। वहीं, आतंकवाद के गढ़ रहे अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर जिलों में मूसा को पनाह देने वाले भी कई हो सकते थे। दोनों राज्यों के कट्टरपंथी संगठनों के बीच तालमेल की एक वजह यह भी है कि दोनों को ही पाक की आईएसआई समर्थन देती है।
इसलिए तो नहीं उड़ाई मूसा के पंजाब में होने की खबर
एक तरफ जांच एजेंसियां पंजाब और कश्मीर के कट्टरपंथियों के बीच कनेक्शन तलाश रही है। तो दूसरी तरफ इसके बिल्कुल उल्टी थ्योरी पर भी काम किया जा रहा है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कहीं कश्मीर के आतंकी जाकिर मूसा के पंजाब में होने की खबर जानबूझ कर तो नहीं उड़ाई गई। यह भी संभव है कि योजनाबद्ध ढंग से खुफिया एजेंसियों को इनपुट दिया गया कि मूसा अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन में कहीं छिपा है।
तीनों जिलों की पुलिस ने भी आनन-फानन में मूसा के पोस्टर लगा दिए और लोगों से मदद करने की अपील की। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि मूसा के होने की खबर इसलिए उड़ाई गई ताकि सारी एजेंसियां उसके पीछे लग जाएं। जिसके बाद दूसरा गुट आसानी से अपना काम करके निकल जाए।