निरंकारी भवन के बाहर तैनात पुलिस बल
शबनमदीप ने निहाल की तरफ से भेजे गए फंडों से एक सीटी-100 बजाज प्लैटिना मोटरसाइकल और एक नया मोबाइल फोन भी खरीदा था। बटाला पुलिस ने 31 मई, 2018 को दो कट्टरपंथियों धरमिंदर सिंह और कृपाल सिंह को गिरफ्तार किया, जिन्होंने जिला पुलिस बटाला के श्री हरगोबिन्दपुर ब्लॉक में पड़ते गांव हरपुरा धनडोई और पंजगरियों में दो शराब के ठेकों को आग लगा दी थी। मकसद, सिर्फ दहशत फैलाना था और इसके लिए भी विदेशों से फंड मुहैया करवाया गया था।
आईबी की रिपोर्ट के अनुसार कनाडा में हरदीप निझ्झर ने खालिस्तान टेरर फोर्स के ऑपरेशनल हेड की जिम्मेदारी संभाली हुई है। मूल रूप से पंजाब का निवासी हरदीप निज्जर 1995 से ही सरे में कनाडा के पासपोर्ट पर रह रहा है। निझ्झर को पंजाब सरकार ने आतंकवादी घोषित कर रखा है और 2007 के शिंगार सिनेमा धमाके में वह वॉन्टेड है। इस हमले में छह लोगों की मौत हो गई थी।
निझ्झर ही पंजाब के आतंकवादियों के लिए मुख्य केंद्र बिंदू है, जो न केवल पाकिस्तान बल्कि यूरोप के देशों में रहने वाले पूर्व आतंकवादियों के संपर्क में है और पंजाब में फंड मुहैया करवा रहा है। पंजाब में हिंदू नेताओं की हत्या के लिए भी पैसा यूके से आया था। हिंदू नेताओं और दिल्ली में 1984 दंगे के आरोपियों जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार की हत्या के लिए 82 करोड़ रुपये भेजे जाने थे, जिसमें कुछ पैसा भेजा जा चुका था।
हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों को मुहैया करवाने के लिए धर्मेंद्र सिंह गुगनी को 20 लाख रुपये दिए गए थे, जिसको मोगा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
फरीदकोट पुलिस ने इसी साल खालिस्तान समर्थक दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर उनसे दो पिस्तौल और 40 गोलियां बरामद कीं। पकड़ा गया संदीप सिंह बठिंडा के गांव बंगी निहाल का जबकि अमर सिंह हरियाणा के सिरसा जिले के गांव चट्ठा का रहने वाला था।
दोनों का कनेक्शन गुरजंट सिंह आस्ट्रेलिया से विदेशी खालिस्तानी एजेंसियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवा रहा है और जनवरी 2016 से लेकर अक्टूबर 2017 के बीच हुए टारगेट किलिंग के आठ मामलों में भी उसकी संलिप्तता थी। गुरजंट सिंह काफी पैसा पंजाब में भेज चुका है।
आतंकवादी पैसों के लालच में ही स्लीपर सेल को खड़ा कर रहे हैं और पंजाब में विदेशों से पैसा भेजा जा रहा है। कई मॉड्यूल ध्वस्त हो चुके हैं, जिसमें साफ हुआ है कि पंजाब के आतंकवादियों को विदेशों से पैसा भेजा जा रहा है। - सुरेश अरोड़ा, डीजीपी