फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Punjab: विकास की दौड़ में पिछड़े पंजाब के शहर, नौ साल बाद भी पूरे नहीं हो पाए स्मार्ट सिटी के कई काम

Mon, 22 Apr 2024 02:51 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

बॉर्डर बेल्ट के गांवों के बाद पंजाब के शहर भी विकास की दौड़ में पिछड़ गए हैं। लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे शहर स्मार्ट सिटी घोषित होने के बावजूद अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं। देश में स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को शुरू हुए 9 साल हो चुके हैं, लेकिन पंजाब के तीनों उपरोक्त शहरों में से एक भी पूरी तरह स्मार्ट नहीं बन पाया है।
विज्ञापन
पंजाब स्मार्ट सिटी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब में स्मार्ट सिटी के कई प्रोजेक्ट वर्षों से अटके पड़े हैं। स्मार्ट सिटी के अलावा कई अन्य बड़े केंद्रीय प्रोजेक्ट भी अभी मूर्त रूप नहीं ले पाए हैं। स्मार्ट सिटीज की 2023 की रैंकिंग के अनुसार राउंड एक में पंजाब के लुधियाना शहर को देश के 20 शहरों में से 19वां स्थान मिला है। 13 फास्ट ट्रैक शहरों और राउंड तीन में पंजाब का एक भी शहर शामिल नहीं है। हालांकि राउंड दो में जरूर अमृतसर ने पहला स्थान पाया है, लेकिन यहां भी कई काम अभी अधूरे हैं। 

विज्ञापन


लुधियाना में सीवरेज अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट रद्द होने का खतरा 
लुधियाना नगर निगम की ट्रैफिक जाम की समस्या के समाधान के लिए बनाया गया बुड्ढा नाला व सिधवां नहर पर नया पुल बनाने की योजना अटक गई है। नगर निगम ने सड़क धंसने की समस्या से निपटने के लिए करीब 150 करोड़ की लागत से डॉट टाइप सीवरेज की अपग्रेडेशन के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया था। उसे टेंडर की प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के मद्देनजर ड्रॉप कर दिया गया है। अब उस फंड खर्च करने के लिए  छह स्थानों पर नए पुल बनाने के प्रस्ताव को स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत फंड जारी करने से सरकार ने इन्कार कर दिया है। कहा गया है कि जिस जगह पुल बनाने की सिफारिश की गई है, वो इलाका ए-बी-डी पैटर्न में शामिल नहीं है। निगम अधिकारियों के अनुसार 150 करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर संकट के बादल है।

जालंधर स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट विजिलेंस के निशाने पर
जालंधर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत जालंधर शहर में कुल 60 प्रोजेक्ट में से अब तक 30 ही पूरे हो पाए हैं। लंबे समय से अटके प्रोजेक्टों के कारण शहर की स्थिति काफी बिगड़ गई है। वहीं, कुछ प्रोजेक्ट विजिलेंस के निशाने पर हैं। पूर्व केंद्रीय कानून व विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी को एक पत्र लिखा था, जिसमें मांग की गई थी कि जालंधर स्मार्ट सिटी में केंद्र सरकार के पैसों के दुरुपयोग और उनमें हुए भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की निष्पक्ष जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से करवाई जाए। पंजाब सरकार भी जालंधर स्मार्ट सिटी में हुए घोटालों की जांच विजिलेंस को सौंप चुकी है।

विजिलेंस के जालंधर यूनिट में जालंधर स्मार्ट सिटी के भ्रष्टाचार और लापरवाही संबंधी जो जांच चल रही है, उसमें सबसे पहला एक्शन एलईडी स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट पर होना माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में दिल्ली की कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप है। प्रोजेक्ट की लागत पूर्व सीईओ ने मनमर्जी से 14 करोड़ रुपये बढ़ा दी थी। एलईडी प्रोजेक्ट का टेंडर 49.44 करोड़ का था। दिल्ली की एक कंपनी ने इसे करीब 44 करोड़ में हासिल किया। जो काम 44 करोड़ रुपये में होना चाहिए था, वह 58 करोड़ तक पहुंच गया। टेंडर में साफ लिखा था कि पुरानी लाइटों को उतारकर नया लगाना है। शहर में 43 हजार के करीब पुरानी लाइटें उतार कर 72 हजार से ज्यादा नई लाइटें लगाई गईं। इस पूरे प्रोजेक्ट में पारदर्शिता का काफी अभाव था। 

100 करोड़ खर्च करने के बाजूद आधा शहर अंधेरे में
जालंधर में 58 करोड़ की नई लाइटें लगाने के साथ-साथ शहर में इस समय हजारों ऐसी एलईडी स्ट्रीट लाइटें हैं, जिन्हें या तो पुरानी कंपनी ने लगाया हुआ है या उन्हें नगर निगम, सांसद या विधायक की ग्रांट से लगवाया गया है। कई लाइटें स्मार्ट सिटी के अन्य प्रोजेक्टों के तहत भी लगी हैं । कुछ लाइटें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और पीडब्ल्यूडी जैसे विभागों द्वारा भी लगाई गई हैं, इसलिए शहर के स्ट्रीट लाइट सिस्टम पर करीब 100 करोड़ खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद आधा शहर अंधेरे में है।

शहरों की स्वच्छता रैंकिंग में भी गिरावट
स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 के नतीजे में पंजाब 7वें स्थान पर है, जबकि जालंधर 239वें स्थान पर लुढ़क गया। पिछली बार जालंधर का रैंक 154 पर पहुंच गया था। जालंधर निगम की बात करें तो इस शहर में स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत मिशन तहत करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद शहर की हालत काफी खराब है। स्वच्छता के मामले में पटियाला, मोहाली, बठिंडा, बरनाला, पठानकोट, अबोहर, होशियारपुर जैसे छोटे शहर भी जालंधर से आगे रहे। जालंधर शहर अब लुधियाना और अमृतसर से भी पिछड़ गया है। इस बार केंद्र सरकार द्वारा दी गई स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में पूरे पंजाब के शहरों की स्थिति पर नजर दौड़ाई जाए तो साफ है कि जालंधर शहर की हालत आज पंजाब के पटियाला, मोहाली, बठिंडा, बरनाला, पठानकोट, अबोहर, होशियारपुर जैसे छोटे शहरों से भी खराब है।

कचरा प्रबंधन पर नहीं दिया गया कोई ध्यान 
अकाली-भाजपा के 10 साल के बाद कांग्रेस पार्टी पांच साल पंजाब और जालंधर निगम की सत्ता पर काबिज रही। आज आम आदमी पार्टी को आए भी दो साल होने को हैं, परंतु इस कार्यकाल के दौरान हर राजनेता, हर अफसर ने कचरा प्रबंधन पर कोई ध्यान नहीं दिया। इन सालों दौरान शहर की तमाम सड़कों पर कूड़ा खुले में पड़ा रहा। मोहाली जैसे शहर सफाई कंपनियों के विवाद के कारण लगातार लिफ्टिंग की परेशानी से दो चार हो रहे हैं।
विज्ञापन

मुकाम तक नहीं पहुंच पाए कई काम
जालंधर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत होने वाले लगभग सभी काम लटके हुए हैं। ऐसे कई कार्य हैं, जो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत होने थे, लेकिन कुछ जरूरी काम जैसे शहर में हर चौराहे पर कैमरे लगाना, शहर की सड़कों व चौराहों को नया बनाना आदि शामिल था। सबसे पहले अगर इंडीग्रेटिड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की बात करें तो इस प्रोजेक्ट के तहत शहर भर में कैमरे लगाए जाने थे, जो अभी तक नही हो सका है। इसके बाद शहर में चार ऐसी स्मार्ट सड़कें बननी थीं, जिन सड़कों पर न तो कोई बिजली की तार नजर आनी थी। इन्हें गड्ढा रहित किया जाना था। इन सड़कों पर फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, बैठने के लिए बेंच आदि लगाए जाने थे, जो आज तक नहीं हो सका। शहर में 22 करोड़ की लागत से 11 स्मार्ट चौक बनने थे। इस प्रोजेक्ट के तहत इनको खूबसूरत बनाया जाना था। इसके आसपास की सड़कें चौड़ी की जानी थी। इन सड़कों पर सर्विस लेन बनाई जानी थी। साथ ही इन चौराहों पर पार्किंग बनाई जानी थी, लेकिन यह प्रोजेक्ट भी अभी तक ठंडे बस्ते में ही पड़ा हुआ है। स्मार्ट सिटी के तहत मात्र यह प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो या तो शुरू ही नहीं हो सके या फिर शुरू होने के बाद ही बंद हो गए। इन प्रोजेक्ट पर 80 प्रतिशत पैसे केंद्र सरकार व 20 प्रतिशत पैसा राज्य सरकार का लगना था, लेकिन शहर वासी इन सभी प्रोजेक्ट से मरहूम रह गए हैं। 

गुरुनगरी में भी जमीन पर नहीं उतर पाए विकास कार्य
गुरुनगरी अमृतसर के दो बड़े प्रोजेक्ट वर्षों से लंबित पड़े हुए हैं। इनमें से कई पर काम शुरू करने की कोशिशें हुई, लेकिन अभी तक इन प्रोजेक्टों को पूरा नहीं किया गया। महानगर में पहला प्रोजेक्ट मल्टी स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने का था। रंजीत एवेन्यू एरिया में इस वर्ष 2010 में नवजोत सिंह सिद्धू ने बनाने का सपना दिखाया था। इस प्रोजेक्ट के लिए 258 करोड़ का बजट रखा गया था और यह प्रोजेक्ट 21 एकड़ एरिया में स्थापित किया जाना था। इसके लिए जगह का भी चयन कर लिया गया। इस कॉम्प्लेक्स का राज्य के तीन मुख्य मंत्रियों की ओर से नींव पत्थर रखा गया। परंतु अभी तक इस प्रोजेक्ट पर ईंट भी नहीं लगी। इस प्रोजेक्ट का सब से पहले एलान नवजोत सिद्धू ने किया जब व सांसद थे। इस के बाद उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने 2011 में नींव पत्थर रखा। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस 2017 में नींव पत्थर रखा।

2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी इस का नींव पत्थर रखा। इस प्रोजेक्ट का नाम श्री गुरु राम दास मल्टी स्पोर्ट काॅम्प्लेक्स रखा गया था, परंतु इस पर कोई काम नहीं हुआ। महानगर में दूसरा प्रोजेक्ट बीआरटीसी बस प्रोजेक्ट है, जो महानगर के रोजाना पैसेंजर की सुविधा के लिए था, ताकि वह ऑॅटो चालकों की मनमानियों से आर्थिक शोषण का शिकार न हो। 650 करोड़ से यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसके लिए 120 से अधिक बसों की व्यवस्था की गई थी। इससे पहले सिटी बस सर्विस शुरू की गई थी। इसको बंदकर बीआरटीसी शुरू किया गया। दिसंबर 2016 में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को 27 जनवरी 2019  को दोबारा नवजोत सिंह सिद्धू ने स्थानीय निकाय मंत्री होने के वक्त शुरू किया था, लेकिन परंतु इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट की बसें खड़ी कर दी गई, जो अब कबाड़ का रूप धारण कर गई हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें