ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट नहीं कर पाया इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम
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चंडीगढ़ की सड़कों पर निकलते समय जरा सावधान रहिए। खासकर इन सड़कों पर जो काफी खतरनाक हैं। यहां किसी भी मोड़ पर हादसा हो सकता है। चंडीगढ़ पुलिस ने हादसों को ध्यान में रख सड़कों का रुख जाना और सभी जगह के सर्वे के बाद 18 ऐसे प्वाइंट्स की रिपोर्ट तैयार की, जो सबसे ज्यादा खतरनाक हैं।
हालांकि इन प्वाइंट्स को सिर्फ एक्सीडेंट प्रोन एरिया का नाम देने के अलावा कुछ नहीं किया। जबकि होना यह चाहिए था कि दुर्घटना केआंकड़ों से प्वाइंट की पहचान होने केबाद उन खामियों को दूर किया जाता, जिससे हादसे होते हैं।
अमर उजाला इन 18 प्वाइंट्स को सिलसिले वार आपको बताएगा, साथ ही खामियां उजागर करके सुधार के सुझाव बताएगा, ताकि पुलिस और प्रशासन किसी सड़क को सिर्फजानलेवा का टैग देकर लोगों को मरने केलिए न छोड़ दे। पहली किस्त में सेक्टर-25 व 38 का लाइट प्वाइंट और सेक्टर-38 व 40 की सड़क।
यह हैं 18 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र
सड़क पर नियम तोड़ा तो खैर नहीं
1- ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट
2- शास्त्री नगर लाइट प्वाइंट
3- रेलवे लाइट प्वाइंट
4- कलाग्राम लाइट प्वाइंट
5- एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट
6- हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट
7- पोट्रीफार्म चौक
8- ट्रिब्यून चौक
9- कालीबारी लाइट पॉइंट
10-46-47-48-49 लाइट प्वाइंट
11- 45-46-49-50 लाइट प्वाइंट
12- सेक्टर-25-38 लाइट प्वाइंट
13- सेक्टर-38-40 लाइट प्वाइंट
14- हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट
15- जीरीमंडी चौक
16- पेप्सी टर्न
17- आईएसबीटी-43 फ्रंट साइड
18- 44-45-50-51 लाइट प्वाइंट
एक्सीडेंट प्रोन प्वाइंट्स घोषणा करके ट्रैफिक पुलिस भूली
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यूटी पुलिस द्वारा घोषित सेक्टर-25-38 और सेक्टर-38-40 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र का जायजा लिया। हालात यह मिला कि कागजों में एक्सीडेंट प्रोन प्वाइंट्स घोषित होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था जीरो है। आइए इन प्रोन प्वाइंट्स की बदहाली की तस्वीर सामने रखते हैं
सेक्टर-25-38 लाइट् प्वाइंट
सेक्टर-25-38 लाइट प्वाइंट डड्डूमाजरा, मलोया, धनास रोड, सारंगपुर रोड, सेक्टर-25, सेक्टर-37, 38 और मध्यमार्ग के सेक्टरों में निकलने का चालू रास्ता है। वहां पर ना दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र का साइन बोर्ड, ना रेडियम का सांकेतिक, ना कोई अनाउसमेंट सुविधा, ना नाकेबंदी और ना विशेष सुरक्षाकर्मी की ड्यूटी लगी थी। चौराहें पर लाइटे लगी होने के बावजूद वाहन चालक मनमर्जी रेड लाइट जंप कर एक-दूसरे से टकराते-बचते निकल रहे हैं।
प्रशासन को दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों के बोर्ड, लाइटें और अन्य चेतावनी व सुरक्षा संबंधी सामान लगवाने का प्रपोजल नहीं मिला है। लेटर मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की सहमति होती है और उसके बाद सभी व्यवस्था की जाती है।
मुकेश आनन्द, चीफ इंजीनियर, प्रशासन
एक्सीडेंट प्रोन प्वाइंट्स हर साल बदलते है और इनकी पहचान कर पुलिस विभाग प्रशासन को सौंप देता है। इसके बाद बाकी के काम प्रशासन और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट का होता है। प्राथमिक तौर पर खानापूर्ति करने से एक्सीडेंट्स पर लगाम नहीं लगाई जा सकती है। चंडीगढ़ में हिट एंड रन के मामले में काफी तेजी से बढ़ने लगे है।
हरमन सिद्धू, अराइव सेफ के संस्थापक