जतिन सहगल के पिता राजन सहगल ने जब उससे बात की तो दोनों भावुक हो गये। जतिन ने बताया कि बॉर्डर से सटे होने के कारण खारकीव में हालात बिगड़ते जा रहे हैं...पापा यहां से निकालिये। जतिन ने फोन पर बताया कि भारतीय दूतावास ने ऑनलाइन जानकारी मांगी थी जो उन्हें दे दी गई है और दो दिन बीत चुके हैं लेकिन उनकी खबर लेने कोई नहीं आया।
राजन सहगल ने बताया कि वह बीमा एजेंट का काम करते हैं। उनका बेटा जतिन कुछ दिनों पहले शादी में आया था और 10 फरवरी को यूक्रेन वापस लौट गया था। उन्हें पता होता कि हालात बिगड़ सकते हैं तो बेटे को भेजता ही नहीं। उन्होंने 27 फरवरी की वापसी की टिकट की थी लेकिन वह रद्द हो चुकी हैं। उनकी सरकार से गुजारिश है कि बच्चों को जल्द से जल्द वहां से निकाला जाए।
15 फरवरी को लौटे मनप्रीत बोले- छात्र कह रहे थे लड़ाई नहीं होगी, हालात ठीक हो जाएंगे
यूक्रेन-रूस संकट की बीच जब मंहगाई बढ़ने लगी और हालात स्थिर हो गए तो जालंधर के टीवी टावर नकोदर रोड का रहने वाला मनप्रीत पुत्र गुरदीप सिंह वहां से निकल आया। तब उसके साथ पंजाब व देश के कई राज्यों के 25-30 छात्र साथ में रहते थे। उन्हें भी साथ आने को कहा था। उन छात्रों ने कहा था कि दोनों देशों के बीच आपसी मसले हैं।
वह बातचीत से सुलझ जाएंगे, कोई लड़ाई नहीं होने वाली। तब न उसने सोचा था, न उन छात्रों ने जो यूक्रेन में फंसे हैं। अब उसे साथ में रहने वाले कई दोस्तों के फोन आ रहे हैं और मदद करने की गुहार लगा रहे हैं। कुछ दोस्त ऐसे हैं जो हालात देखकर घबरा गए हैं और मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। उनका भी दोस्तों के साथ संपर्क टूटने लगा है, दोस्त अब सिर्फ घरवालों के फोन ही उठा रहे हैं।