सूत्रों का दावा है कि चंडीगढ़ में ठोस खेल पॉलिसी नहीं बनने के पीछे यहां की अफसरशाही रही है। चंडीगढ़ के अफसर कभी भी खेल नीति के प्रति गंभीर नहीं रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कभी इस दिशा में पहल नहीं की है। स्थानीय कोच व पूर्व खिलाड़ी लगातार इस संबंध में अपनी आवाज बुलंद करते रहे, लेकिन फिलहाल कोई असर नहीं दिखा। हालांकि खेल की सलाहकार परिषद ने अब इस मुद्दे को मजबूती से उठाया है। कोरोना से पहले इस संबंध में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन की अगुवाई में कई मीटिंग भी हुई थी और इसके सकारात्मक परिणाम भी निकलकर आए हैं। अब बताया जा रहा है कि इस संबंध में जल्द ही एक और बैठक बुलाने का फैसला हुआ है, ताकि खेल पॉलिसी नीति पर कोई ठोस निर्णय लिया जा सके।
मेडल जीतने पर दो से तीन लाख, कोई नौकरी नहीं
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से मेडल जीतने पर खिलाड़ियों को नाम मात्र की राशि दी जाती है। चंडीगढ़ में सर्वोच्च सम्मान दो से तीन लाख रुपये है। जबकि पंजाब व हरियाणा में सर्वोच्च सम्मान दो गुना से ज्यादा है। पंजाब में खिलाड़ियों को शीर्ष खेल तौर पर महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड मिलता हैं। इसके तहत खिलाड़ियों को पांच लाख रुपये के नकद पुरस्कार से नवाजा जाता है। इसी तरह से हरियाणा के खिलाड़ियों को भी भीम अवॉर्ड के तहत पांच लाख रुपये दिए जाते हैं।
शहर के दिग्गज खिलाड़ी और भारत को पहला वर्ल्ड कप दिलाने वाले कपिल देव व चेतन शर्मा चंडीगढ़ के बजाय हरियाणा से खेले। इसके अलावा क्रिकेटर अशोक मल्होत्रा, योगराज सिंह, युवराज सिंह, दिनेश मोंगिया, वीरआरवी सिंह, अमित उन्याल, विश्वास भल्ला, सिद्धार्थ कौल पंजाब से खेले। ओलंपिक कोटा दिलाने वाली और टोक्यो ओलंपिक में खेलने वाली शूटिंग खिलाड़ी अंजुम मोदगिल और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान राजपाल सिंह पंजाब से खेले और सरकारी नौकरी भी पाई। इंटरनेशनल आर्चरी खिलाड़ी कपिल को शहर में खेल कोटे में नौकरी नहीं मिली इसके बाद उन्हें भारतीय रेल विभाग ने नौकरी दी। अब वे रेलवे की टीम से खेलते हैं।
क्या कहना है कि खिलाड़ियों का
खेल विभाग को खिलाड़ियों की जरूरतों को समझते हुए स्पोर्ट्स नर्सरी, नौकरियों में स्पेशल कोटा, बेहतर कैश अवार्ड देना चाहिए, जिससे खिलाड़ी दूसरे राज्यों से न खेले। यदि ऐसा होता है कि काफी अच्छा टैलेंट देश को मिल सकता है।
- रूपिंदर पाल सिंह, हॉकी टीम के ओलंपियाड खिलाड़ी
ऐसी खेल पॉलिसी बनाई जानी चाहिए, जिससे शहर का खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतते हुए अपने शहर का खिलाड़ी ही कहलाए। उसे दूसरे राज्यों की तरह सम्मान भी मिले। ठोस पॉलिसी ही खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करती है और वे पदक भी जीतकर लाते हैं।
-कपिल, आर्चरी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
अगर शहर के खिलाड़ियों को खेल कोटे से नौकरी मिले और खेल पॉलिसी का फायदा मिले तो यहां का खिलाड़ी दूसरे राज्यों से कभी न खेले।
- अंजुम मोदगिल, ओलंपियन
शहर में खेल पॉलिसी बनाने के लिए प्रयासरत हूं। दो से तीन बार बैठक भी हो चुकी है। कोविड की वजह से थोड़ी देरी हुई है। जल्द ही एक मजबूत खेल नीति बनेगी। - संजय टंडन, चेयरमैन एडवाइजरी स्पोटर्स काउंसिल