यह फोटो पंचकूला सेक्टर-21 की है। 11 अक्तूबर को खींची गई तस्वीर में शिवालिक की पहाड़ियां साफ दिख रही
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पाबंदी के बावजूद हरियाणा में जमकर पटाखे चलाए गए। ग्रीन पटाखों को लोगों ने कम तवज्जो दी। त्योहार की आड़ में 200 से अधिक स्थानों पर पराली जलाई गई, जिससे प्रदेश की हवा में प्रदूषण घुला। दिवाली के बाद प्रदेश के पांच शहरों की हवा बेहद खराब हो गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 पार पहुंचने की वजह से एक भी शहर की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सबसे अधिक गुरुग्राम में 371 और फरीदाबाद में 354 दर्ज किया गया। पंचकूला, पानीपत, नारनौल, पलवल, रोहतक और सिरसा का एक्यूआई ही 200 से नीचे रहा। 11 शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर 200 से 300 के बीच में आंका गया। हालांकि, दिवाली पर वायु प्रदूषण का स्तर बीते साल के मुकाबले कम रहा।
पराली जलाने के मामले बढ़े
प्रदेश में पराली जलाने का औसतन आंकड़ा मंगलवार को लगभग 200 तक पहुंच गया। बीते सप्ताह यही आंकड़ा 30 से 50 तक था। ग्राम स्तर पर निगरानी और नोडल अधिकारी तैनात करने के बावजूद त्योहार के कारण किसान अपना काम कर गए। जिलों में ग्रीन की जगह प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे खुलेआम बेचे और चलाए गए। प्रशासन की ओर से पटाखे चलाने से रोकने को लेकर कोई सख्ती नहीं की गई।