संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। मंत्रों में अत्यंत व्यापक शक्ति निहित है। मंत्र का आशय है- जो हमारे मन को प्रभावित करे। मंत्र अत्यंत सूक्ष्म होता है, लेकिन इसकी शक्ति अपरंपार होती है। देवी-देवता मंत्रों के अधीन होते हैं। ठीक वैसे ही जैसे एक छोटा अंकुश विशालकाय मदमस्त हाथी को वश में कर लेता है। यह प्रवचन तीन दिवसीय ऋद्धि सिद्धि दीपावली अनुष्ठान के दूसरे दिन सेक्टर- 24 के अनुव्रत भवन के तुलसी सभागार में मनीषी संत मुनिश्री विनय कुमार आलोक ने दिए।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य साधारण शब्दों के माध्यम से एक-दूसरे से अपने मन को जोड़ता है, ठीक उसी प्रकार परमपिता परमेश्वर से संबंध स्थापित करने के लिए मंत्र उच्चारित किए जाते हैं। मनीषी संत ने कहा कि मंत्रों में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा होती है, जो जन्म-जन्मांतर के अंध तमस को कुछ क्षणों में मिटाने का कार्य करती है। जिन मंत्रों के प्रभाव से सभी कामनाओं की सहज ही सिद्धि मिलती है जो मनुष्य के परम लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होते हैं, उन मंत्रों के उद्गम स्रोत वेद हैं। वेद मंत्र भगवान की वाणी है। मनीषी संत ने कहा कि मंत्र ऐसी शक्तियों का भंडार है जो निर्बल को बलवान, शक्तिहीन को शक्तिमान, बेसहारे की बैसाखी का काम करता है। मंत्रों की शक्तियों का अनुमान लगाना असंभव है। मंत्र मुश्किल क्षणों में ऊर्जा का श्रोत साबित होता है। मंत्र हमें हर बुराई और विघ्न-बाधाओं से बचाता है।