एक महिला आगरा से चंडीगढ़ अपने सुहाग को ढूंढने को आई, लेकिन अभागन को पति की बजाय उसकी अस्थियां और निशानियां लेकर लौटना पड़ा। 15 नवंबर को माता मनसा देवी के दर्शन के लिए पति के साथ आई ममता पर विपदा टूट पड़ी।
यहां बिछुड़े पति को छह दिन तक उसने कई जगह ढूंढा मगर एक हफ्ते बाद पति की अस्थियां ही उसे मिलीं। रो-रोकर उसका बुरा हाल था। ममता बार-बार यही कह रही थी कि अब उसका कोई सहारा नहीं बचा। शनिवार शाम को ममता पति की अस्थियां और उसकी निशानियां लेकर आगरा लौट गई।
ऐसे लापता हुआ था पति
15 नवंबर को ममता पति ठाकुर दास के साथ आगरा से यहां माता मनसा देवी मंदिर दर्शन के लिए आई थी। वह बताती है कि दर्शन के बाद दोनों मनीमाजरा में एक चाय की दुकान पर बैठे। कुछ देर बाद उसका पति वहां से सॉक्स लेने चला गया। कुछ देर इंतजार के बाद जब ममता उसे ढूढ़ने लगी तो ठाकुर दास कहीं नहीं मिला।
घबराई ममता चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर इस आस में पहुंची कि कहीं उसका पति उसे ढूंढते हुए स्टेशन तो नहीं पहुंच गया। मगर ठाकुर दास वहां भी नहीं मिला। फिर वह आगरा चली गई। एक-दो दिन बाद पति के वापस न लौटने पर उसने वहां स्थानीय पुलिस से मदद मांगी, लेकिन मामला चंडीगढ़ का होने के चलते उसे चंडीगढ़ स्टेशन पर पता करने की सलाह दी गई। तब वह वापस चंडीगढ़ पहुंची।
तो शायद बच जाता ठाकुर दास
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 15 नवंबर की रात जीआरपी अगर ड्यूटी पर मुस्तैद होती तो शायद ठाकुर दास बच जाता, लेकिन उस दिन अमर उजाला के रियल्टी चेक में जीआरपी की लापरवाही सामने आई। रात करीब साढ़े दस बजे अमर उजाला की टीम चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से मुआयना करते हुए पंचकूला की तरफ पहुंची।
कार पार्किंग के पास कुछ राहगीरों की भीड़ एकत्रित थी, मौके पर जाने पर पता चला कि कार पार्किंग के पास पुलिया के नीचे एक युवक गिरा हुआ है। वहां एक भी जीआरपी जवान नहीं दिखा। इसके बाद जीआरपी एसएचओ और जीआरपी के हेल्पलाइन नंबर पर प्रत्यक्षदर्शियों ने कॉल किया।
कॉल के 15 से 20 मिनट बाद जीआरपी थाने के लैंडलाइन नंबर से कॉल आया कि युवक पंचकूला रेलवे स्टेशन की तरफ कहां गिरा है। पता बताने के बाद भी पुलिस मुलाजिम मौके पर आने की बजाय प्रत्यक्षदर्शी से बहस करते रहे। कॉल के 40 मिनट बाद मौके पर सिर्फ एक पुलिस का मुलाजिम पहुंचा।
मौके पर पहुंचने के बाद वह लोगों से उलझ पड़ा। फिर युवक को गड्ढे से बाहर निकालने की जद्दोजहद शुरू हुई। पहले तो एसआई रंजीत सिंह गड्ढे में घुसने की बजाय ऑटो चालकों को आदेश देते रहे। इसके बाद खुद गड्ढे में उतरे। ऑटो चालकों की मद्द से युवक को बाहर निकाला गया।
अस्पताल पहुंचाने के लिए भी साधन नहीं था
ट्रेन की चपेट में आकर कोई घायल हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए जीआरपी के पास कोई साधन नहीं है। युवक को जब रविवार रात गड्ढे से बाहर निकाला गया तो रंजीत सिंह ने ऑटो चालकों से मदद मांगी। युवक को पंचकूला सेक्टर 6 के जनरल अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत बताया। बाद में उसी की पहचान ठाकुर दास के रूप में हुई।