हालांकि, कई दिन तक मनप्रीत बादल भूमिगत बने रहे। इस दौरान विजिलेंस ने उनका एलओसी जारी करवाया था। इसके बाद जब वह पकड़ में नहीं आ रहे थे तो अरेस्ट वारंट जारी करवाए थे। इसके बाद मनप्रीत सिंह बादल ने पंजाब एंड हरियाणा कोर्ट की शरण ली थी। 16 अक्तूबर को उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली थी। अदालत ने उन्हें जमानत देते हुए विजिलेंस की जांच ज्वाइन करने को कहा था। 18 अक्तूबर को विजिलेंस ने उन्हें समन भेजकर 23 को पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन उन्हें अपना मेडिकल भेज दिया था। साथ कहा था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। इसके बाद अदालत ने उन्हें दोबारा तलब किया था।
मनप्रीत बादल ने कहा कि विजिलेंस ने उन्हें बुलाया इसका वह स्वागत करते हैं। किसी पर केस दर्ज कर लिया तो वह गुनाहगार नहीं हो जाता। आरोप साबित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया है। विजिलेंस सरकार की एजेंसी है, इसमें वह जांच पर विश्वास नहीं कर सकते हैं। पंजाब सरकार की हिदायत के अनुसार विजिलेंस काम करती है। अगर निष्पक्ष जांच करवानी है तो केस सीबीआई को सौंपा जाए।
सीएम को नसीहत, जुर्म इतना करो जितना खुद बर्दाश्त कर सको
मनप्रीत बादल ने सीएम भगवंत मान को नसीहत देते हुए कहा कि जुर्म इतना करो जितना खुद बर्दाश्त कर सको। सियासत में हर किसी का समय एक जैसा नहीं होता है। विजिलेंस उन्हें 100 बार बुलाए वह जांच में शामिल होने के लिए आएंगे। उन्हें भारत के कानून व हाईकोर्ट पर पूरा विश्वास है। वह कानून के दायरे में रहकर हर प्रक्रिया का पालन करेंगे।