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Manmohan Singh: ...जब पीयू में 47 सीढ़ियां न चढ़ पाए थे मनमोहन सिंह, पूर्व पीएम से मिलने बाहर निकल आए थे छात्र

Fri, 27 Dec 2024 09:34 AM IST
शाहरुख खान हरीश कोचर, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह वर्ष 2018 में पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ ऑडिटोरियम में पत्नी के साथ लेक्चर देने के आए थे। इस दौरान मनमोहन सिंह पीयू के अर्थशास्त्र विभाग तक जाने के लिए 47 सीढ़ियां भी नहीं चढ़ पाए थे। 
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Manmohan Singh passed away - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज से करीब पौने सात साल पहले वर्ष 2018 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पंजाब यूनिवर्सिटी में लॉ ऑडिटोरियम में लेक्चर देने के लिए आए थे। लेकिन लेक्चर देने के बाद वह अपनी पत्नी के साथ अपनी पुरानी यादों को याद करने के लिए अर्थशास्त्र विभाग की बिल्डिंग के यहां पहुंच गए। लेकिन तबीयत ठीक नहीं होने के कारण दूसरे फ्लोर पर विभाग तक जाने के लिए वह 47 सीढ़ियां तक नहीं चढ़ पाए थे। जब वह सीढ़ियां चढ़कर ऊपर नहीं जा सकते थे तो विभाग के छात्र उनसे मिलने के लिए नीचे गए और मनमोहन ने अपनी पत्नी समेत इनसे मुलाकात की थी।
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दरअसल पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में वर्ष 2018 में जवाहरलाल नेहरु चेयर के प्रोफेसर डॉ. मनमोहन सिंह प्रो. एसबी रंगनेकर मेमोरियल पर लेक्चर देने के लिए पहुंचे थे। इसके साथ ही देश की 70वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ ‘मजबूत होता लोकतंत्र’ विषय पर लॉ ऑडिटोरियम में सुबह 10:00 बजे लेक्चर का आयोजन किया गया था। 

इस दौरान उन्होंने देश की राजनीति से लेकर देश के विकास सहित अन्य कई अहम मुद्दों पर विद्याथियों के बीच बातचीत की थी। यह लेक्चर खत्म होने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को कहा कि अब वह उन्हें वहां लेकर जाएंगे जहां पहले उन्होंने खुद बैंच पर बैठकर पढ़ाई और बाद में उसी क्लास में विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम किया। 
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मनमोहन सिंह अपनी पत्नी के साथ डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स में पहुंचे लेकिन उक्त विभाग में सेकेंड फ्लोर पर था। विभाग तक पहुंचने के लिए करीब 47 सीढि़यों को पार किया जाना था। लेकिन वह दूसरी मंजिल पर अपने विभाग तक पहुंचने के लिए 47 सीढ़ियां नहीं चढ़ सके, इसलिए उन्होंने ग्राउंड फ्लोर पर अर्थशास्त्र संकाय के सदस्यों और छात्रों से मुलाकात की। 
 

उन्होंने वहां मौजूद छात्रों और शिक्षकों से कहा कि मुझे पुरानी यादें बहुत याद आ रही हैं। मैं ऊपर जाना चाहता था, लेकिन मैं नहीं जा पा रहा हूं। उन्होंने अपने एक फ्रेम किए गए उद्धरण पर भी हस्ताक्षर किए, जिसमें लिखा था, मैं भारत के भविष्य को लेकर आश्वस्त हूं। 

 

मेरा दृढ़ विश्वास है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख केंद्र के रूप में भारत का उदय एक ऐसा विचार है, जिसका समय आ गया है। परंपरा को आधुनिकता और एकता को विविधता के साथ मिलाकर हमारा यह देश दुनिया को आगे का रास्ता दिखा सकता है।
 

कहा मुझे प्रो. रंगनेकर ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय जाने के लिए प्रेरित किया
ग्राउंड फ्लोर पर पत्नी के साथ खड़े-खड़े ही पूर्व प्रधानमंत्री ने पीयू अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. रंगनेकर को एक महान शिक्षक के रूप में याद किया और एक स्मरण सुनाते हुए बताया कि उन्होंने ही उन्हें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय जाने के लिए प्रेरित किया था। 
 

“कैम्ब्रिज से लौटने पर, मैं एक वरिष्ठ व्याख्याता के रूप में विभाग में शामिल हो गया। इसके तुरंत बाद अर्थशास्त्र विभाग चंडीगढ़ चला गया और मुझे डॉ. रंगनेकर के साथ विभाग में काम करने का सौभाग्य मिला। डॉ. रंगनेकर और उनकी पत्नी ने मुझे और मेरी पत्नी को अपने परिवार के सदस्य की तरह माना। 
 

वह मेरे जीवन का सबसे सुखद समय था और मैं इसे कृतज्ञता के साथ याद करता हूं।” इस दौरान ने विभाग के 15 छात्र स्वयंसेवकों से पूर्व पीएम ने मुलाकात की और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। इसके बाद मनमोहन सिंह ने कैंपस में गुरु तेग बहादुर रीडिंग हॉल का दौरा किया, जहां उनकी 3,500 पुस्तकों की लाइब्रेरी बनाई गई थी। 

2016 में पंजाब विश्वविद्यालय में जवाहरलाल नेहरू चेयर स्वीकार करने के बाद उन्होंने अपनी लाइब्रेरी को अपने अल्मा मेटर को दान करने का वादा किया था और अपना वादा निभाया। इसके अलावा, उन्होंने कुछ पेंटिंग भी दान की हैं। 

 
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1966 में विश्वविद्यालय में अध्यापन छोड़ने के बाद, उन्होंने दो बार परिसर का दौरा किया और दोनों मौके पर उन्हें मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्हें 12 मार्च, 1983 को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि और फिर 11 मार्च, 2009 को उन्हें डॉक्टर ऑफ लॉ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
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