फलों के राजा आम का नाम और उसे देखते ही मुंह में पानी आ जाता है। आम का सीजन शुरू हो गया है। इस बार रेट काफी महंगे हैं। आम के आढ़तियों का कहना है कि इस बार फसल कम है। ऐसे में रेट अधिक है। इस समय बाजार में सफेदा, सिंदूरी और पैरी की ही आम की किस्म आई है।
सफेदा और पैरी आंध्र प्रदेश है। आढ़तियों का कहना है कि अगले माह आम की और किस्में भी आनी शुरू हो जाएंगी। जिससे जहां रेट कम होगा वहीं दशहरी, चौसा, लंगड़ा, रत्नागिरी, केसरिया लालपत्ता, कलमी और लाल बाग की फसल यूपी से शहर में आनी शुरू हो जाएगी। जबकि तोता आम की फसल कर्नाटक और बंगलूरू से आएगी। सफेदा के बाद दशहरी आम की मांग अधिक रहती है।
जून से देसी (लोकल) आम भी शुरू हो जाएगा। आम से प्रशासन को भी लाखों की कमाई होगी। क्योंकि मंडी में होने वाले आम के कारोबार से दो प्रतिशत फीस मार्केट कमेटी के व्यापारी से चार्ज की जाती है।
मसाले से पकने वाले आम की बिक्री पर पाबंदी: मार्केट कमेटी के सचिव राजेंद्र कुमार का कहना है कि इस समय मंडी में रोजाना एक गाड़ी ही आम की आ रही है। जिसमें 10 टन आम होता है। उनका कहना है कि इस समय रेट अधिक है, लेकिन अगले माह और किस्में आने से रेट कम होने की उम्मीद है। राजेंद्र कुमार का कहना है कि मसाले से आम पकाने वालों को कारोबार नहीं करने दिया जाएगा। कई लोग जो मसाले की पूड़ी से आम पकाते हैं, उसमें कैल्शियम कार्बाइड होता है। यह चंडीगढ़ में प्रतिबंधित है।
क्या रेट है इस समय
किस्म--रेट
सफेदा--140
पैरी--180
सिंदूरी--120
शहर के आम की इस बार नीलामी नहीं होगी
आम का सीजन
- फोटो : amar ujala
100 रुपये का एक आम
बाजार में ऐसा भी आम है, जिसकी कीमत सुनकर हर कोई हैरान हो रहा है। एक आम की कीमत 100 रुपये है। इसका नाम अलफेंसो है। शहर के एक बड़े नेता भी इस किस्म के दीवाने हैं। आढ़तियों का कहना है कि अलफेंसो आम का अधिकतर निर्यात ही होता है। सेक्टर-26 मंडी में हिमाचल फ्रूट के संचालक विक्की साहनी का कहना है कि रोजाना 50 से 60 पीस ही अलफेंसो के बिकते हैं। इसकी कीमत कभी भी कम नहीं होती है।
फसल कम है
शिवा फ्रूट के संचालक राम लाल गोगी का कहना है कि इस बार आम की फसल कम है। इसलिए रेट काफी अधिक है। दशहरी आम आने के बाद ही रेट में गिरने की उम्मीद है। गोगी का कहना है कि अभी आंध्रप्रदेश और गुजरात से आम की जो फसल आ रही है, वह कम है।
इस समय शहर में कई जगह आम के पेड़ सड़क के किनारों, रिहायशी इलाकों और कुछ पार्कों में लग हैं। जिसमें अभी आम नहीं लगे हैं। इनमें आम मई के अंत तक आ जाएंगे। इस बार इन पेड़ों पर लगे आम नीलाम नहीं किए जाएंगे। इन पर शहरवासियों का ही अधिकार है। यह फैसला निगम ने लिया है। लेकिन इनमें राजेंद्र पार्क में लगे आम के हजारों पेड़ शामिल नहीं हैं।
मेयर अरुण सूद का कहना है कि इस बार पेड़ों पर लगे फलों की नीलामी नहीं की जाएगी। फलों वाले अधिकतर पेड़ शहरवासियों ने ही लगाए हैं। लेकिन उन्हें हर साल नीलाम करने की प्रथा गलत थी। जो बंद कर दी गई है।