गेहूं खरीद से ठीक पहले मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। 2017 में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में पंजाब में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने पर उन्हे यह अहम जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि उनके इस्तीफे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि किसानों को बिल्कुल विचलित होने की जरूरत नहीं है। किसानों को सिर्फ मुझ पर विश्वास बनाए रखना होगा।
पंजाब में गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने 132 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। सरकार का दावा है मंडियों में पर्याप्त बारदाना (बोरियां) पहुंच चुका है। गेहूं खरीद के लिए राज्य में 2300 से ज्यादा मंडियां बनाई गई हैं। सोमवार को गेहूं खरीद के लिए पंजाब सरकार को 24,773.11 करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) मिल गई है। ऐसे समय में मंडी बोर्ड के चेयरमैन पद से लाल सिंह के इस्तीफे को लेकर पंजाब के सियासी गलियारे में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता लाल सिंह को यह महत्वपूर्ण पद दिया गया था।
बोर्ड व निगमों में विधायक होंगे शामिल
पंजाब में सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सूबे के बोर्ड व निगमों में विधायकों को शामिल करने की कवायद शुरू कर दी है। मान ने विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से उनके अंतर्गत आने वाले बोर्ड व निगमों की सूची तलब कर ली है। मुख्यमंत्री कार्यालय से सभी विभागों को यह संदेश प्रेषित कर दिया गया है।
यहां आएगी दिक्कत
मुख्यमंत्री भगवंत मान को उन सहकारी संस्थाओं में परेशानी आएगी जिनमें चुने हुए डायरेक्टर और चेयरमैन लगे हैं। उन्हे पद मुक्त करने के लिए पंजाब की सरकार को दिक्कतें पेश आएंगी। इन संस्थाओं में मार्कफेड, मिल्कफेड आदि बड़ी सहकारी संस्थाएं शामिल हैं।