हरियाणा का शहीद सैनिक मेजर अमित देशवाल
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आर्मी डे यानी 15 जनवरी को जन्मे रणबांकुरे मेजर अमित देशवाल घर तो आए, पर तिरंगे में लिपटकर। सेना के विशेष हेलीकॉप्टर में सेना के अधिकारी उनका पार्थिव शरीर पहले झज्जर पुलिस लाइन पहुंचा। वहां से उसे झज्जर आवास के लिए रवाना कर दिया गया। उनके गांव सुरेहती में अंतिम संस्कार की रस्में चल रही हैं।
मणिपुर के तामेंगलांगजिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में मेजर अमित देशवाल के शहीद होने की खबर से जहां ग्रामीणों की आंखें भी नम थी, वहीं शहीद के घर में कोहराम मचा था। मेजर अमित के वृद्ध पिता ऋषिराम देशवाल को बेटे को खोने का गम था, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था कि उनका लाल देश के लिए शहीद हुआ।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसे और सपूतों की जरूरत है जो सीने पर दुश्मनों की गोलियां रोकते हैं। मणिपुर में आतंकवादी संगठन एनएससीएन और जेडयूएएफ के खिलाफ चलाए जा रहे एक विशेष ऑपरेशन से जुड़े सुरेहती के रणबांकुरे मेजर अमित देशवाल ने एक आंतकी को ढेर कर अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।
नहीं थम रहे मां के आंसू
बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद से ही शहीद की मां बेदवती की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बार-बार बेटे की याद में बेसुध होकर गिर रही मां को बेटे के शहीद होने पर गर्व है, लेकिन उसकी यादों को वो भुला नहीं पा रहीं। शहीद अमित के भाई अंकित ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके बड़े भाई ने देश के लिए लड़ते हुए अपनी जान दी।