‘आजादी से पहले गांधी जी ने देश के लोगों को रोजगार मुहैया करवाने के लिए खादी की मुहिम चलाई थी। इससे काफी युवा प्रभावित हुए थे। उनमें से वे भी एक थे। 1955 में जब मेरी उम्र करीब 18 साल की थी उस समय मैंने खादी को ज्वाइन किया था।’ यह कहना है पंजाब खादी मंडल खरड़ के चेयरमैन राम नाथ का। उन्होंने बताया कि जब देश आजाद हुआ और पाकिस्तान बना था उस समय देश की हालत अच्छी नहीं थी। न तो खेतीबाड़ी अच्छी थी और न ही सरकारी नौकरियां थी। ऐसे में खादी ही देश के लोगों के लिए सहारा बनी थी। आजादी के बाद सरकार ने खादी को अपने अधीन ले लिया।
बाकायदा खादी कमीशन बन गया था। साथ ही खादी ने अपना काम शुरू कर दिया था। प्रत्येक गांव में खादी सेंटर खुले गए थे। इससे काफी लोगों को रोजगार मिल गया। अन्य ग्रामोद्योग के प्रोडक्ट भी खादी के अधीन आ गए थे। इस दौरान लोगों से खरीदकर वे सामान को शोरूम तक लाते थे। राम नाथ ने बताया कि जब उन्होंने खादी को ज्वाइन किया था उस समय कह दिया गया था कि वेतन कम मिलेगा। करीब 55 रुपये वेतन उन्हें मिलता था। अभी भी खादी से जुड़े लोगों को वेतन कम मिलता है।
रेडिमेड की शुरुआत खादी से हुई
राम नाथ ने बताया कि खादी अब भी आम लोगों से जुड़ा है। वैसे जो शर्ट मार्केट में पांच से दस हजार की मिलती है उसे खादी के शोरूम में साढ़े पांच सौ में खरीदा जा सकता है। खादी से ही मार्केट में रेडिमेड का चलन शुरू हुआ। सबसे पहले खादी ने ही रेडिमेड कुर्ता पायजामा मार्केट में उतारा था। इसके बाद मार्केट ने खादी का अनुसरण किया। खादी के पास ही सारे डिजाइन व अन्य चीजें थी। हालांकि दूसरे देशों से आने वाले सिंथेटिक से इसको थोड़ा झटका जरूर लगा है।
प्रधानमंत्री ने खादी को दी नई जान
राम नाथ ने बताया कि अब युवा भी खादी से जुड़े रहे हैं। खादी में नए डिजाइन आ रहे हैं जो युवाओं को भा रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद खादी के ब्रांड एंबेस्डर हैं। इतना ही नहीं मोदी ने मन की बात से भी लोगों को खादी पहनने का संदेश दिया था।